समान साक्ष्य में आरोपी से भेदभाव नहीं कर सकते: कोर्ट..
चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में करीब 23 साल बाद हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अमित जोगी को आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और 302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 1000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।तो किसी एक आरोपी के पक्ष में बनावटी भेदभाव नहीं किया जा सकता।चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने 2003 में हुई हत्या के इस मामले में 78 पन्नों में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि ये मानना हास्यास्पद है कि बाकी दोषियों ने अमित को खुश करने के लिए उनकी जानकारी के बिना इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया।न्होंने बताया कि 21 मई 2003 को रायपुर के होटल ग्रीन पार्क में हुई बैठक में अमित जोगी ने साफ कहा था कि एनसीपी की रैली को रोकने के लिए राम अवतार जग्गी को खत्म करना होगा।

