📝 *खबर (निलेश सोनी):
गोंडवाना साम्राज्य की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मांग तेज
— कोलकाता संग्रहालय में अलग गैलरी व ‘सोने के सिक्के’ को पुनर्स्थापित करने पर जोर
20 वर्ष पूर्व मौजूद रहे गोंडवाना के स्वर्ण सिक्के को
Indian Museum Kolkata में पुनः रखने की मांग, Gondwana Ganatantra Party ने आदिवासी इतिहास के संरक्षण को राष्ट्रीय मुद्दा बनाया

गोंडवाना साम्राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर उचित स्थान दिलाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है।
Gondwana Ganatantra Party के राष्ट्रीय महासचिव Shyam Singh Markam एवं अन्य पदाधिकारियों ने कोलकाता दौरे के दौरान महत्वपूर्ण मांगें उठाते हुए कहा कि आदिवासी इतिहास को मुख्यधारा के राष्ट्रीय संग्रहालयों में समुचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया कि लगभग 20 वर्ष पूर्व Indian Museum Kolkata में गोंडवाना साम्राज्य का “सोने का सिक्का” मौजूद था, जिसे पुनः संग्रहालय में स्थापित किया जाना चाहिए।


यह केवल एक धरोहर नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और गौरव का प्रतीक है।
पार्टी नेताओं ने यह भी मांग रखी कि संग्रहालय में गोंडवाना साम्राज्य एवं आदिवासी समाज के इतिहास, संस्कृति और योगदान को दर्शाने के लिए एक अलग स्थायी गैलरी बनाई जाए।

इस मांग को लेकर संबंधित अधिकारियों द्वारा सकारात्मक आश्वासन भी दिया गया है।
ऐतिहासिक दृष्टि से यह पहल गोंडवाना साम्राज्य की समृद्ध परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास है,
वहीं प्रशासनिक दृष्टि से यह केंद्र और राज्य सरकारों के लिए आदिवासी इतिहास के संरक्षण एवं सम्मान की दिशा में ठोस कदम उठाने की जिम्मेदारी तय करता है।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई नहीं होती, तो इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक आंदोलन के रूप में उठाया जाएगा।

