📝 *खबर (निलेश सोनी):
🟥 हेडलाइन
ग्राम पंचायत कछाड़ी के आश्रित ग्राम भगवतपुर में भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) का दूरसंचार टावर बीते कई वर्षों से बंद पड़ा है,
जिससे पूरे गांव में संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है। यह स्थिति न केवल तकनीकी लापरवाही को उजागर करती है,
बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल समावेशन के सरकारी दावों पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

ग्रामीणों का कहना है कि टावर बंद होने से मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट, ऑनलाइन शिक्षा, बैंकिंग सेवाएं, स्वास्थ्य आपातकालीन संपर्क जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं।
कई बार शिकायतों के बावजूद न तो टावर की मरम्मत हुई और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
👉 प्रशासनिक लापरवाही या सिस्टम की अनदेखी?
यह मामला सीधे तौर पर संबंधित दूरसंचार विभाग और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही तय करता है।
सवाल यह उठता है कि आखिर वर्षों से बंद पड़े इस टावर की समीक्षा क्यों नहीं हुई? क्या क्षेत्रीय निरीक्षण, मेंटेनेंस और रिपोर्टिंग सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है?
👉 जनहित से जुड़ा गंभीर मुद्दा
डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों के बीच, इस तरह की लापरवाही ग्रामीणों को मुख्यधारा से काट रही है।
यह केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में दूरसंचार ढांचे की हकीकत को उजागर करने वाला मामला बन सकता है।
📢 ग्रामीणों की मांग:
बंद पड़े BSNL टावर को तत्काल चालू किया जाए
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई हो
वैकल्पिक नेटवर्क व्यवस्था (अन्य कंपनियों/टावर) उपलब्ध कराई जाए
उच्चस्तरीय जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
⚠️ चेतावनी:
यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों ने जनआंदोलन और उच्च स्तर पर शिकायत करने की चेतावनी दी है।
👉 अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी प्राथमिकता देता है, या फिर ‘डिजिटल इंडिया’ के दावे केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।

