खबर नीलेश सोनी…….
आरटीआई के माध्यम से सामने आए खुलासे ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरे प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार एक व्याख्याता शिक्षक द्वारा प्रिंसिपल के कथित फर्जी हस्ताक्षर कर वेतन आहरण किया गया, जो नियमों और नैतिकता—दोनों के विपरीत है।?

यह प्रकरण केवल एक व्यक्ति की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि विभागीय निगरानी तंत्र की गंभीर कमजोरी को उजागर करता है।?
चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ?
इससे यह संदेश जाता है कि नियमों के उल्लंघन पर भी जवाबदेही तय नहीं हो पा रही है। ?
ऐसे मामलों में त्वरित जांच, दस्तावेज़ों का सत्यापन और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा अनिवार्य है,
ताकि सत्य सामने आ सके और व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।?


जनहित में आवश्यक है कि सक्षम अधिकारी निष्पक्ष जांच कर स्पष्ट निर्णय लें।?
देरी और चुप्पी न केवल संदेह को बढ़ाती है, बल्कि ईमानदार कर्मचारियों का मनोबल भी तोड़ती है। अब वक्त है कि पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जाए।

