Home अपराध आंध्र–छत्तीसगढ़ सीमा पर हिड़मा सहित 6 माओवादी ढेर, ग्रेहाउंड्स का बड़ा ऑपरेशन………….

आंध्र–छत्तीसगढ़ सीमा पर हिड़मा सहित 6 माओवादी ढेर, ग्रेहाउंड्स का बड़ा ऑपरेशन………….

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आंध्र प्रदेश/छत्तीसगढ़ : गुरुवार की सुबह (18 नवम्बर 2025) आंध्र प्रदेश के ऑलुरी सीतारामा राजू जिला (Alluri Sitarama Raju district) के मारेदुमिली जंगल में सुरक्षा बलों और माओवादी के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में 6 नक्सली मारे गए, जिनमें छत्तीसगढ़-नक्सल आंदोलन के एक प्रमुख और अत्यंत वांछित नेता माडवी हिड़मा (Madvi Hidma) भी शामिल थे।

लीडर की पहचान

मारा गया माओवादी नेता माडवी हिड़मा था, जो CPI (माओवादी) का एक ऊँचा कमांडर और Dandakaranya स्पेशल जोन कमेटी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। उसके ऊपर सुरक्षा बलों की लिस्ट में बड़ा इनाम (लगभग ₹1 करोड़) था। मिडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि हिड़मा “कम से कम 26 खतरनाक माओवादी हमलों” में शामिल रहा है। हिड़मा की पत्नी, जिन्हें रिपोर्ट्स में राजे (Rajakka / Raje) के नाम से जाना जाता है, भी उसी मुठभेड़ में मारी गई हैं।

मुठभेड़ की घटना

यह मुठभेड़ तड़के सुबह करीब 6:30 बजे से 7 बजे के बीच हुई। ऑपरेशन पुलिस और विशेष बलों (संभवतः आंध्र प्रदेश पुलिस + ग्रेहाउंड्स) का था। मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके में सर्चिंग (कंबिंग ऑपरेशन) जारी रखा है, ताकि शेष नक्सली बचे हों तो उन्हें पकड़ा जाए।

हथियार बरामदगी

मौके से AK-47 राइफलें बरामद की गई हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि मारे गए माओवादी heavily armed थे।सुरक्षाबलों ने बताया है कि नक्सलियों का ये समूह “उच्च स्तरीय” कैडर था (ACM — Area Committee Member)।

माडवी हिड़मा कौन था? 

हिड़मा का नाम लंबे समय से माओवादी खेमे में खौफनाक रहा है; वह छत्तीसगढ़ के नक्सली इलाकों में सक्रिय रहा है और उसकी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती थी। उसने सुरक्षा बलों पर कई हिंसक हमला किए थे, जिनमें बड़े पैमाने की फायरिंग और नक्सली कमांडों के इन्फिल्ट्रेशन शामिल थे। वह CPI (Maoist) की Centrale Committee में था, और उसकी मांडवी कमान अति खतरनाक स्ट्राइक यूनिट (PLGA Battalion No.1) से जुड़ी थी।

सुरक्षा बलों और सरकार की प्रतिक्रिया

इस कार्रवाई को माओवादी विद्रोह के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है क्योंकि हिड़मा जैसे ऊँचे धड़े का कमांडर मरना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा झटका है। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने मुठभेड़ के बाद इलाके में और गहन तलाशी अभियान तेज़ कर दिए हैं, ताकि अन्य माओवादी कमांडर या कैडर के बचे सदस्यों को सुरक्षित न निकलने दें। स्थानीय प्रशासन ने हिंसा की इस घटना पर कहा है कि यह “नक्सल आन्दोलन को कमजोर करने की दिशा में एक निर्णायक कदम” है। (सरकारी बयान विभिन्न रिपोर्टों में उभरे हैं)

रणनीतिक धक्का: हिड़मा की मृत्यु नक्सली संगठन के लिए रणनीतिक क्षति हो सकती है क्योंकि वह लंबे समय से संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था।

सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता: यह मुठभेड़ यह दर्शाती है कि राज्य और केंद्र सरकार नक्सलवाद के ख़िलाफ़ सक्रिय और तीव्र मोर्चेबन्दी कर रही है, खासकर आंध्र-छत्तीसगढ़ सीमावर्ती जंगलों में।

संभावित पुनर्गठन: हालांकि यह एक बड़ी सफलता है, लेकिन ऐसे मामलों में यह देखना होगा कि माओवादी संगठन पुनर्गठन कर पाता है या नहीं – विशेष रूप से स्थानीय रैंक-संरचना में बदलाव कर।

स्थानीय सुरक्षा और शांति: मुठभेड़ के बाद इलाके में लोगों की सुरक्षा और पुनरावलोकन ज़रूरी होगा — क्योंकि बड़े माओवादी नेताओं की मौत के बाद इलाके में अस्थिरता भी बढ़ सकती है, लेकिन इससे आम लोगों के लिए राहत भी हो सकती है।

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