कोरिया/ गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान टाइगर रिजर्व में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जनकपुर परिक्षेत्र के अंतर्गत च्यूल गांव में लगभग 19 लाख 50 हजार रुपये की लागत से निर्मित मिट्टी-मुरूम सड़क पहली ही बारिश में बह जाने से ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में भारी गड़बड़ी की गई है और सरकारी धन का खुला दुरुपयोग हुआ है। सड़क पर न तो उचित गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया और न ही निर्माण के बाद रोलर चलाया गया। इसके बजाय जंगलों से लाई गई अमानक गिट्टी और मिट्टी डालकर खानापूर्ति की गई।
ग्रामीणों का आरोप — “भ्रष्टाचार का गड्ढा बनी सड़क”
च्यूल से वॉच टॉवर तक लगभग 3 किलोमीटर लंबी सड़क कुछ ही महीनों में पूरी तरह जर्जर हो गई है। सड़क पर जगह-जगह कटाव हो चुका है, कई हिस्सों में गिट्टी बह गई है और केवल मिट्टी शेष रह गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का गड्ढा बन गई है।
वन संपदा को भी पहुंचा नुकसान
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण के लिए मिट्टी आसपास के जंगलों से निकाली गई, जिससे वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रभारी रेंजर और निर्माण एजेंसी की मिलीभगत से यह काम किया गया।
निरीक्षण की बजाय मिलीभगत
वन विभाग के अधिकारियों ने सड़क निर्माण कार्य का समुचित निरीक्षण नहीं किया। नतीजतन, चार महीनों में ही सड़क का अस्तित्व मिट गया। ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में सरकारी राशि की ऐसी ही बर्बादी होती रहेगी।
पुरानी शिकायतें भी दबाई गईं
ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। इससे पहले सोनहत और रामगढ़ परिक्षेत्र में स्टाफ डेम निर्माण में हुई गड़बड़ी की शिकायतें संचालक कार्यालय बैकुण्ठपुर से लेकर वन मंत्री और मंत्रालय तक भेजी गई थीं, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे भ्रष्टाचारियों के हौसले और बढ़ गए हैं।
संचालक के मौन पर सवाल
गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व के संचालक लगातार क्षेत्रीय दौरों पर रहते हैं, फिर भी घटिया निर्माण कार्य बिना रोक-टोक जारी हैं। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर संचालक मौन क्यों हैं? क्या यह सब उच्च स्तर के संरक्षण में हो रहा है?
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस प्रकरण में जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।


