जिला सूरजपुर के ब्लॉक विश्रामपुर-जयनगर में दिवाली के पूर्व से ही जुआ खेलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि जयनगर थाने के पीछे जुआ चल रहा था, यह पुलिस विभाग के लिए बहुत शर्म की बात है। इससे यह प्रतीत होता है कि पुलिस की नाक के नीचे यह जुआ चल रहा था। सूत्रों का दावा है कि पुलिसकर्मियों को इससे हजारों रुपये की दैनिक आय हो रही थी।
अभी हाल का वाक्या है कि, जयनगर थाना क्षेत्र के कुंज नगर में पुलिस ने जुआ खेलने की सूचना पर रात्रि को छापा मारा, जहां एक युवक बाबूलाल राजवाड़े पिता चंद्रेश्वर राजवाड़े उम्र लगभग 24-25 निवासी कुंजनगर झारपारा ने पुलिस को देखा और भयभित होकर भागने लगा, उसके कुछ ही दूरी पर पास के एक कुएं में गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने थाने में तोड़फोड़ की और पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया।
सोचने वाली बात है कि, पुलिस के अत्याचारों के कारण आम जनता में आक्रोश है। लोगों का मानना है कि पुलिस विभाग पैसे की वसूली में किसी भी हद तक जा सकता है, यहां तक कि किसी की जान भी ले सकता है। पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या है। कई मामलों में पुलिस पर आरोप लगते हैं कि वे पैसे की वसूली के लिए गलत तरीके अपनाते हैं और निर्दोश लोगों को परेशान करते हैं। क्योंकि दिवाली के मौके पर अपने उच्च अधिकारियों को मोटी रकम पहुंचाने के लिए तत्पर रहते है।
वहीं पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या है। कई पुलिसकर्मी वसूली के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए कानून का गलत इस्तेमाल करते हैं। क्योंकि पुलिस विभाग अपना सम्मान बचाने में भी नहीं बचा पता है। वहीं आज कुछ पुलिस वाले वसूली के दम पर करोड़ों के आसामी बन चुके है। क्योंकि इनका काम लोगों को झूठा फंसाना, शराब बेचवाना, जूंआ और अन्य अवैध काम ही इनका मेन पैसा कमाने का जरिया है।
अब देखने वाली बात यह है कि, उच्च अधिकारी पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे या आम जनता के खिलाफ ? वहीं मृतक के परिवार को छत्तीसगढ़ शासन को ऐसी घटना को देखते हुए 50 लाख रुपये का मुआवजा देना चाहिए, जिससे लोगों में शासन के प्रति सहानुभूति बनी रहे। साथ ही, ऐसे कृत्यों को लेकर थाना प्रभारी और समस्त स्टाफ के खिलाफ पुलिस अधीक्षक और आईजी तक कार्रवाई होनी चाहिए। यह समाचार आम जनता द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है।



