जिला मुख्यालय बलरामपुर में कुछ नई पीढ़ी के प्यून एवं महिलाऐं दारू के नशे में देखे गये है। यह एक गंभीर समस्या है जो न केवल कार्यालय की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है, बल्कि सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता को भी खराब करती है। जिसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भी दिया गया है। अब पता नहीं पैसा देकर नौकरी पाये हुए है या दबाव में ? क्या विभाग दबाव में चल रहा है या कुछ और कारण है ? क्योंकि बलरामपुर जिले में जहां तक शासन की योजना के अन्तर्गत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है पर देखा जाये तो 40 प्रतिशत लाभ उठा रहे है इससे कार्य प्रभावित हो रहा है और कुछ कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर पा रहे हैं। कहीं-कही तो देखा जा रहा है कि, अपने विभागों के कुर्सी में ही सो जा रहे है। जो कार्यालयीन अनुशासन के विरुद्ध है। इससे न केवल कार्यालय की साख खराब होती है, बल्कि सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
वहीं कुछ लोगों का मानना है कि, महिला आरक्षण का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना है, लेकिन इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। और शराब के नशे में देखे गए कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करना आवश्यक है। साथ ही सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और योग्यता के आधार पर नियुक्ति होनी चाहिए। यह समाचार प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकाशित किया जा रहा है।



