इंश्योरेंस कंपनियों पर अक्सर धोखाधड़ी के आरोप लगते चले आ रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि ये कंपनियां पॉलिसी बेचने के लिए झूठे वादे करती हैं और बाद में क्लेम देने में आनाकानी करती हैं। इंश्योरेंस कंपनियों पर आरोप है कि वे पॉलिसी बेचने के लिए आकर्षक विज्ञापन और वादे करते हैं, लेकिन जब क्लेम देने की बात आती है तो वे कई तरह की शर्तें और नियमों का हवाला देकर भुगतान करने से बचते हैं।
वहीं जब किसी वाहन का बीमा किया जाता है तो आमतौर पर सम्पूर्ण वाहन का बीमा किया जाता है, न कि अलग-अलग पार्ट्स का। लेकिन जब दुर्घटना होती है और क्लेम करने की बात आती है तो बीमा कंपनी एजेंट द्वारा अक्सर कुछ पार्ट्स के लिए भुगतान करने से इनकार कर देते है, जैसे कि कांच व रबर। यहां तक कि, बीमा कंपनी का सर्वेयर दुर्घटना के बाद वाहन की जांच करता है और नुकसान की सीमा का आकलन करता है। इसके आधार पर बीमा कंपनी क्लेम की राशि तय करती है। और बीमा एजेंट की जिम्मेदारी है कि वह पॉलिसीधारक को पॉलिसी की शर्तों और नियमों के बारे में पहले से पूर्ण रूप से स्पष्ट बताए। यदि एजेंट ऐसा नहीं करता है, तो यह धोखाधड़ी का मामला हो सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक शो रूम मालिक ने पुरानी गाड़ी में पेट्रोल डालकर आग लगा दी। वह व्यक्ति पवन नामक व्यक्ति के साथ मिलकर काम कर रहा था, जिसने मोटरसाइकिल शो रूम को करोड़ों रुपये का लाभ पहुंचाया था। जब बीमा कंपनी ने इसका सर्वे किया, तो उसने अपनी जिम्मेदारी के अनुसार जांच की। और सर्वेयर ने गरीब और आम व्यक्ति के साथ गलत व्यवहार किया और पैसे के बिना गलत रिपोर्ट बीमा कंपनी को दी। वहीं बीमा कंपनी सर्वेयर को वेतन और अन्य भत्ते देती है, लेकिन इसके बावजूद भी सर्वेयर पर आरोप है कि वह अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर रहे है और गरीब व्यक्तियों के साथ भेदभाव करते है।
लोगों में चर्चा है कि, बीमा एजेंटों द्वारा धोखाधड़ी के आरोपों की जांच करना आवश्यक है, खासकर जब वे लगभग 12-15 वर्षों तक पॉलिसीधारकों से प्रीमियम लेते हैं और फिर क्लेम देने में आनाकानी करते हैं। ऐसे में बीमा एजेंटों की जांच होनी चाहिए कि जब वे नियुक्त हुए थे तब उनकी संपत्ति क्या थी और अब उनकी संपत्ति कितनी है ? यह जांच का विषय है। इससे पता चलेगा कि उन्होंने अपने पद का कितना दुरुपयोग किया है। साथ ही बीमा एजेंटों को पॉलिसीधारकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए और उन्हें अपने अधिकारों के बारे में जागरूक कराना चाहिए। एजेंटों को पॉलिसीधारकों से खरीदारी का बिल मांगने का कोई अधिकार नहीं है और यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे पॉलिसी की शर्तों और नियमों को स्पष्ट रूप से समझाएं। यह समाचार आम जनता के विचारधाराओं द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।



