जबलपुर में हिंदू संगठनों ने मंदिरों में पारंपरिक वस्त्र पहनने की अपील करते हुए पोस्टर लगाए हैं। इन पोस्टरों में महिलाओं और पुरुषों से भारतीय संस्कृति के अनुरूप कपड़े पहनने का अनुरोध किया गया है। इन पोस्टरों में छोटे वस्त्र, हाफ पैंट, बरमूडा, मिनी स्कर्ट, नाइट सूट, जींस-टॉप जैसे पश्चिमी परिधानों पर आपत्ति जताई गई है। यह अभियान सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने का प्रयास है, न कि प्रतिबंध, कुछ लोगों ने इसका स्वागत किया है जबकि कुछ ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया है।
संस्कारधानी कहे जाने वाले शहर जबलपुर में इन दिनों एक नई पहल के तहत हिंदूवादी संगठनों ने मंदिरों में भारतीय संस्कृति के अनुरूप ड्रेस कोड लागू करने की अपील की है। इस अभियान के तहत मिनी स्कर्ट, जींस-टॉप, हाफ पैंट, बरमूडा, नाइट सूट जैसे वेस्टर्न परिधानों में मंदिरों में प्रवेश करने पर आपत्ति जताई गई है। इस के तहत शहर के 30 से अधिक प्रमुख मंदिरों के बाहर पोस्टर लगाए गए हैं। जिनमें श्रद्धालुओं से भारतीय परंपरा के अनुरूप कपड़े पहनने और मंदिर में प्रवेश से पूर्व सिर ढकने की अपील की गई है। साथ ही पोस्टर के नीचे महाकाल संघ अंतरराष्ट्रीय बजरंग दल का जिक्र किया गया है। पोस्टर के नीचे लोगों से इसे अन्यथा ना लेने और भारतीय संस्कृति को बचाने का भी उल्लेख किया गया है।
पोस्टर के मुख्य बिंदु
01. मंदिर में प्रवेश के लिए ड्रेस कोड – मंदिरों में प्रवेश करते समय महिलाओं और पुरुषों को मर्यादित वस्त्र पहनने की अपील की गई है।
02. अनुचित कपड़ों पर आपत्ति – मिनी स्कर्ट, जींस-टॉप, हाफ पैंट, बरमूडा, नाइट सूट जैसे पश्चिमी परिधानों पर आपत्ति जताई गई है।
03. भारतीय संस्कृति का सम्मान – पोस्टरों में कहा गया है कि मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति का प्रतीक भी है।
04. सांस्कृतिक जागरूकता अभियान – हिंदू संगठनों का कहना है कि यह एक सांस्कृतिक जागरूकता अभियान है, न कि प्रतिबंध।
05. व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मुद्दा – कुछ लोगों ने इस पहल का स्वागत किया है, जबकि अन्य ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया है ।
06. अनुचित कपड़ों पर आपत्ति – पश्चिमी परिधानों पर आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि ऐसे कपड़े पहनकर आने पर मंदिर के बाहर ही दर्शन करने होंगे।
07. महिलाओं के लिए विशेष अपील – महिलाओं से सिर ढककर मंदिर में प्रवेश करने और साड़ी या सलवार सूट जैसे आदर्श जनक कपड़े पहनने की अपील की गई है।
हिंदू संगठनों का उद्देश्य
हिंदू संगठन इस पहल को सांस्कृतिक जागरूकता अभियान के रूप में देख रहे हैं, न कि प्रतिबंध। उनका उद्देश्य महिलाओं को भारतीय परंपरा के अनुसार वस्त्र पहनने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे किसी भी व्यक्ति की धार्मिक भावनाएं आहत न हों।



