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बैकुण्ठपुर/कोरिया : बायपास रोड पर अतिक्रमण हटाने को लेकर राजवाड़े समाज हुआ एकजुट………..

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मुख्यालय बैकुण्ठपुर चरचा स्टेशन के नजदीक बायपास रोड में शासकीय जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई की। जानकार सूत्र बताते है कि, प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के दौरान मानवता की सीमा पार करते हुए लोगों के दुकानों का शटर और पाइप तोड़ दिए। लोगों का कहना है कि, प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई की, क्योंकि कुछ लोगों को नोटिस दिया गया, जबकि कुछ लोगों को नहीं। इससे लोगों में आक्रोश है और प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया जा रहा है।

वहीं लोगों का कहना है कि, बैकुण्ठपुर में बायपास रोड के निर्माण के दौरान प्रशासन ने अतिक्रमण को रोकने के लिए उस वक्त कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? अगर उस समय अतिक्रमण को रोका गया होता, तो आज लोगों के साथ दुरव्यवहार करने की नौबत नहीं आती। अब सवाल उठ रहे हैं कि, प्रशासन ने बायपास रोड के निर्माण के दौरान अतिक्रमण को रोकने के लिए क्या कदम उठाए थे ? लोगों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण आज अतिक्रमण की समस्या उत्पन्न हुई है और लोगों को परेशानी हो रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैकुण्ठपुर नगर पालिका में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान सौतेला व्यवहार करने की चर्चा चल रही हैं। अस्पताल के सामने से चाय और नाश्ते की गुमटियां हटाई गईं, लेकिन मेन रोड पर फूलमाला और फल बेचने वालों का अतिक्रमण नहीं हटाया गया। जानकार सूत्रों का कहना है कि, नगर पालिका के आरआई पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं और उन्होंने प्रेमाबाग में अपने परिवार के नाम से गलत ढंग से पट्टा बनवाया है। राजस्व विभाग में पैसे देकर जमीन का नामांतरण कराने के आरोप भी लग रहे हैं। वहीं नगर पालिका द्वारा दुकानों की नीलामी के बाद उन्हें फिर से लगभग 70-80 लाख रुपये में बेचने की खबरें भी सामने आ रही हैं। और तहसीलदार की छत्रछाया में शासकीय जमीन पर दुकानें बनाकर अग्रिम राशि लेकर किराया वसूलने की बाते सामने आ रही हैं। इन सब परिस्थितियों को देखते हुए, लोगों द्वारा कोरिया कलेक्टर से मांग की जा रही है कि वे इस मामले में संज्ञान लें और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराएं। साथ ही लोगों द्वारा बताया जा रहा है कि प्रशासन ईमानदार लोगों को प्रताड़ित कर रहा है और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रहा है। क्योंकि उनको भारत सरकार की शक्तियां मिली हुई है जिसको चाहे फंसाने का कार्य करते रहते है। यह सब पैसे का खेल है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है और अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई कार्रवाई की जांच कैसे की जाती है ? लोगों की मांग है कि, प्रशासन पारदर्शी तरीके से कार्रवाई करे और किसी के साथ अन्याय न हो। यह समाचार आम जनता के विचारधाराओं द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।

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