Home जयंती अंबेडकर जयंती पर जरूर पढ़ें बाबा साहब की बातें……………

अंबेडकर जयंती पर जरूर पढ़ें बाबा साहब की बातें……………

416
0

भारत के इतिहास में जन्मे कई सारे महापुरुषों में से एक बड़ा नाम है बाबा साहब भीमाराव अंबेडकर का, जिन्होंने समाज, शिक्षा, राजनीति और न्याय व्यवस्था की दिशा में कई बदलाव किए। डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर ऐसे ही एक महान विचारक, समाज सुधारक, और संविधान निर्माता थे, जिनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। हर वर्ष 14 अप्रैल को पूरे भारत में अंबेडकर जयंती मनाई जाती है।

अंबेडकर जयंती का दिन 14 अप्रैल का दिन सभी भारतीयों के लिए खास है क्योंकि यह दिन हमें बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उनके योगदान को याद करने का एक अवसर है।

समानता और न्याय पर बाबा साहब अंबेडकर के विचार

बाबा साहब अंबेडकर के विचार समानता और न्याय पर केंद्रित थे। उनके अनुसार, समाज में वास्तविक सुधार तभी संभव है जब सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर मिलें। उन्होंने भारतीय संविधान में समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल सिद्धांतों को शामिल किया। आइए उनके कुछ प्रमुख विचारों पर नज़र डालें:-

– जातिवाद का उन्मूलन: बाबा साहब ने जातिवाद को भारतीय समाज की सबसे बड़ी बीमारी माना। उन्होंने इसे समाप्त करने के लिए कई आंदोलनों का नेतृत्व किया और भारतीय समाज में समानता की आवश्यकता पर जोर दिया। बाबा साहब ने समाज में व्याप्त छुआछूत, जातिवाद और असमानता जैसी बुराइयों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने समाज में समता और न्याय की स्थापना के लिए काम किया।

– समानता और सामाजिक न्याय: उन्होंने समानता और सामाजिक न्याय के महत्व पर प्रकाश डाला। उनके अनुसार, समाज में सभी व्यक्तियों को समान अवसर और अधिकार मिलने चाहिए, चाहे उनकी जाति, धर्म, लिंग या आर्थिक स्थिति कुछ भी हो।

– शिक्षा का महत्व: बाबा साहब ने शिक्षा को समाज में बदलाव लाने का एक शक्तिशाली साधन माना। उन्होंने अपने जीवन में शिक्षा की अहमियत को हमेशा प्राथमिकता दी और इसे दलितों के उत्थान के लिए जरूरी बताया।

– महाड़ सत्याग्रह और मनुस्मृति दहन: बाबा साहब ने महाड़ सत्याग्रह का नेतृत्व किया, जिसका उद्देश्य दलितों को चवदार तालाब का पानी पीने का अधिकार दिलाना था। उन्होंने मनुस्मृति का दहन करके जातिवाद के खिलाफ विरोध किया और समाज में समानता की आवश्यकता को उजागर किया।

– भारतीय संविधान में योगदान: बाबा साहब ने भारतीय संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सुनिश्चित किया कि अनुसूचित जातियों, महिलाओं और अन्य वंचित वर्गों को समान अधिकार मिले और उनके उत्थान के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया। बाबा साहब ने भारतीय संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने संविधान में ऐसे प्रावधान शामिल किए जो समाज के वंचित वर्गों के हितों की रक्षा करते हैं।

– आत्मसम्मान और स्वाभिमान: बाबा साहब ने आत्मसम्मान और स्वाभिमान के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए और अपने आत्मसम्मान की रक्षा करनी चाहिए।

इन विचारों के माध्यम से, बाबा साहब अंबेडकर ने भारतीय समाज में समानता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके विचार और कार्य आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं ।

बाबा साहब के कुछ प्रेरणादायक दोहे भी हैं जो उनके जीवन और विचारों को प्रतिबिंबित करते हैं:-

– महू में जन्मे आप थे, जीवन था संघर्ष: बाबा साहब का जीवन संघर्षों से भरा था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

– शिक्षा के हथियार से, पाया उच्च मुकाम: बाबा साहब ने शिक्षा के बल पर उच्च मुकाम हासिल किया और समाज में अपना स्थान बनाया।

– संविधान के शिल्प को, दे कर के आकार: बाबा साहब ने भारतीय संविधान को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

अम्बेडकर के पावरफुल कोट्स क्या हैं?

डॉ. बीआर अम्बेडकर द्वारा कही गईं ऐसी अनगिनत बातें हैं, जो हर उम्र, हर वर्ग के लोगों को प्रेरणा देने का काम करती हैं। उनकी कही ऐसी ही कुछ दमदार बातें हैं-

  • ‘मैं उस धर्म को नहीं मानता जो मनुष्य को मनुष्य से अलग करता हो।’
  • ‘तुम किताबों के सामने झुक जाओ, ये तुम्हारे सामने दुनिया झुका देंगी।’
  • ‘बंदूक से ज्यादा विचार घातक होत हैं। बंदूक देना आसान है, लेकिन बुद्धि देना कठिन।’
  • ‘तुम्हारे पैरों में जूते भले ना हों, हाथों में किताब जरूर होनी चाहिए।’
  • ‘नारी को शिक्षित करो, वो समाज को संवार देगी।’
  • ‘जो धर्म स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सिखाता है, वही सच्चा धर्म है।’
  • ‘जो लोग अपने इतिहास को भूल जाते हैं, वे कभी नया इतिहास नहीं बना सकते।’
  • मैं ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है।”
  • “अगर मुझे लगा कि संविधान का दुरुपयोग किया जा रहा है, तो मैं इसे सबसे पहले जलाऊँगा।”
  • “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।”
Oplus_131072

आंबेडकर की शिक्षा क्या थी?

  • भीमराव रामजी आंबेडकर ने 1907 में मैट्रिक (10वीं) का एग्जाम पास किया था।
  • उसके बाद एल्फिंस्टन कॉलेज (Elphinstone College) गए, जो मुंबई यूनिवर्सिटी का कॉलेज था।
  • 1915 में इकोनॉमिक्स, सोशियोलॉजी, हिस्ट्री, फिलॉसफी और एंथ्रोपोलॉजी के साथ एमए किया।
  • 1916 में ग्रेज इन में वकालत के कोर्स में दाखिला लिया।
  • फिर लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की।
  • कोलंबिया यूनिवर्सिटी से 1927 में इकोनॉमिक्स में पीएचडी की थी। उसके बाद 1952 में ऑनररी डिग्री ली थी।

सामाजिक-राजनीतिक अत्याचार पर बाबा साहब के विचार

राजनीति और समाज के बारे में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने कहा था- ‘राजनीतिक अत्याचार की तुलना में सामाजिक अत्याचार अधिक क्रूर होता है।’

आज बाबा साहब का महत्व

आज भी भारत में सामाजिक विषमता, जातीय भेदभाव और आर्थिक असमानता जैसी समस्याएं मौजूद हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर का यह कहना बिल्कुल सही था कि – ‘किसी समाज की उन्नति को उस समाज में महिलाओं और कमजोर वर्गों की स्थिति देखकर समझा जा सकता है।’ यदि हम एक समानता वाले समाज की स्थापना करना चाहते हैं तो हमें उनके विचारों को अपनाना होगा। डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती केवल एक महापुरुष के जन्मदिवस के तौर पर याद नहीं रखी जानी चाहिए, बल्कि यह सामाजिक न्याय, समानता और समावेशिता की भावना का उत्सव होना चाहिए। यह दिन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम आज भी उस समाज की ओर बढ़ रहे हैं, जिसका सपना डॉ. अंबेडकर ने देखा था? क्या जातिवाद, सामाजिक विषमता और आर्थिक असमानता आज भी हमारे बीच मौजूद नहीं है?

आंबेडकर ने क्या कहा था?

समानता, मनुष्य के अधिकारों, सामाजिक न्याय के ध्वजवाहक भारत रत्न डॉ बीआर आंबेडकर ने कहा था, ‘मैं मूर्तियों में नहीं, किताबों में हूं। मुझे पूजने की नहीं, पढ़ने की जरूरत है।’

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here