ॐ॥भगवान शिव॥ॐ
भगवान शिव की पूजाए समुद्र मंथन के दौरान शिव द्वारा विष पीने की कथाए और मानसून की ऋतु के कारण मनाया जाता है।

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेंद्रहारम्।
सदा वसंत हृदयारविन्दे भवं भवत् सहितं नमामि॥
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय॥
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
धार्मिक और पौराणिक कारण-
विषपान की कथारू समुद्र मंथन के समय निकला हलाहल विष भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। उस विष की उष्णता ;गर्मीद्ध को शांत करने के लिए शिव जी को जल अर्पित किया जाता है।
शिव को प्रिय – मान्यता है कि सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है, इसलिए इस दौरान सोमवार के व्रत रखे जाते हैं और शिव जी की विशेष आराधना की जाती है।
कांवड़ यात्रा- भक्तगण पवित्र नदियों से जल लाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं।


