गुरूपूर्णिमा में शिष्यो द्वारा महर्षि रिषि देवरहा बाबा की पूजा अर्चना भावपूर्ण वशिष्ट टाइम्स कार्यालय में मनाया गया। जिनकी उर्म लगभग 900 सालो की बताई जाती है । जिनके शिष्य लगभग सभी राजनेता रहें हैं। इनकी विषेताए व चमत्कार देखा गया है। यह हमेंशा गंगा व जमूना के मिनारे ही इनका मचान सदियो से चला आ रहा था । कभी अन ग्र्हण नहीं किए ।
एक समय की बात है, स्वर्गीय इन्दिरा गांधी चुनाव हार चूकी थी । तो महर्षि देवरहा बाबा के दर्षन करने गई थी। तब बाबा के आसिरवाद से उनको चुनाव चिन्ह में हाथ का पंजा मिला उसी वक्त से उनको पूनः सफलता मिली । उनसे शेर, भालू रात्री में मिलने आया करते थे। उन्होने अपने शिष्यो को अगाह किया कि मैं अपने शरीर को परिवर्तित करना चाहता हू।
उन्होने 1990 में अपने समाधि के समय एक मंत्र दिया।
(ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः) उसके उपरांत उनकी ब्रह्मांडी खूल गया। उनके समाधि के समय सैकड़ो कविंटल दूध व हेलीकैपर से पुष्प बरसाए गए। इतना दूध चढ़ाने के बाद भी सारा दूध विलूप्त हो गया । ऐसे महर्षि संत को सतसत नमन।

