एमसीबी/22 जुलाई 2026/ डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों एवं ऑनलाइन ठगी की घटनाओं के बीच बालिकाओं को सुरक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से भारत सरकार की महत्वाकांक्षी श् बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ श् योजना के अंतर्गत जिला महिला सशक्तिकरण केंद्र (हब), महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित ऑनलाइन सुरक्षा एवं साइबर जागरूकता अभियान के दूसरे दिवस का कार्यक्रम शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिरौली में उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को डिजिटल सुरक्षा, साइबर अपराधों से बचाव, कानूनी अधिकारों तथा शासन द्वारा संचालित सहायता सेवाओं की जानकारी देकर उन्हें सुरक्षित एवं सशक्त बनाना था।
कार्यक्रम का आयोजन कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सुश्री संतन देवी जांगड़े के निर्देशानुसार तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री आदित्य शर्मा के मार्गदर्शन में पुलिस अधीक्षक श्रीमती रत्ना सिंह के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का संचालन जिला महिला सशक्तिकरण केंद्र (हब) की जिला मिशन समन्वयक श्रीमती तारा कुशवाहा ने किया। कार्यक्रम में पुलिस विभाग के अधिकारियों ने बालिकाओं को वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों, ऑनलाइन ठगी, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, फर्जी लिंक, ओटीपी फ्रॉड, साइबर बुलिंग, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, डिजिटल धोखाधड़ी एवं ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े जोखिमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, बैंकिंग जानकारी या व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें तथा सोशल मीडिया का उपयोग पूरी सावधानी और जिम्मेदारी के साथ करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तत्काल साइबर हेल्पलाइन अथवा निकटतम पुलिस थाने से संपर्क करने की सलाह भी दी गई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से श्रीमती अंजनी यादव ने बालिकाओं को उनके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों, महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, लैंगिक समानता, साइबर सुरक्षा से संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा न्याय प्राप्त करने की प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बालिकाओं से कहा कि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें तथा किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या अपराध की स्थिति में बिना डर के संबंधित विभाग से सहायता प्राप्त करें। कार्यक्रम में अजय विश्वकर्मा ने मानव तस्करी जैसे गंभीर सामाजिक अपराध पर विस्तार से जानकारी देते हुए इसके कारणों, दुष्परिणामों एवं रोकथाम के उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बालिकाओं को अनजान व्यक्तियों के बहकावे में न आने, नौकरी या शिक्षा के नाम पर मिलने वाले संदिग्ध प्रस्तावों से सावधान रहने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना पुलिस एवं प्रशासन को देने के लिए प्रेरित किया।
जिला महिला सशक्तिकरण केंद्र की जेंडर विशेषज्ञ सुश्री शैलजा गुप्ता ने महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए संचालित विभिन्न शासकीय योजनाओं, एकीकृत सहायता सेवाओं, कौशल विकास, स्वरोजगार, डिजिटल साक्षरता, स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर बालिकाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं और अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकती हैं। वित्तीय साक्षरता एवं समन्वय विशेषज्ञ श्रीमती अनीता कुमारी शाह ने बालिकाओं को विभिन्न महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी आपात स्थिति में महिला हेल्पलाइन 181, साइबर हेल्पलाइन 1930 तथा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 जैसी सेवाओं का तत्काल उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने वित्तीय सुरक्षा, डिजिटल भुगतान के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों तथा ऑनलाइन लेनदेन को सुरक्षित बनाने के उपाय भी साझा किए।
कार्यक्रम में विद्यालय परिवार की ओर से प्राचार्य अजय कुमार, कौशल्या सिंह, इंद्रावती साहू, सुभाषी दास, विभा अग्रवाल, सुरेश साहू सहित शिक्षक-शिक्षिकाओं की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं ने साइबर सुरक्षा, महिला अधिकारों, आत्मरक्षा एवं डिजिटल सुरक्षा से जुड़े विषयों पर उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा सरल एवं व्यवहारिक ढंग से समाधान किया गया। कार्यक्रम के अंत में बालिकाओं को यह संदेश दिया गया कि डिजिटल तकनीक का उपयोग अवसरों के साथ-साथ जिम्मेदारी भी लेकर आता है। जागरूकता, सतर्कता एवं सही जानकारी के माध्यम से ही साइबर अपराधों से बचा जा सकता है। जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य बालिकाओं को सुरक्षित डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराना, उनमें आत्मविश्वास विकसित करना तथा उन्हें जागरूक, सक्षम और सशक्त नागरिक के रूप में तैयार करना है।

