सोनहत वन परिक्षेत्र में तालाब निर्माण को लेकर उठे सवाल अब और गहरे हो गए हैं। जिस तालाब को सरकारी रिकॉर्ड में पूर्ण गुणवत्ता के साथ निर्मित बताया गया, वह पहली ही तेज बारिश में बह गया। इससे निर्माण की गुणवत्ता, विभागीय निगरानी और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि तालाब निर्माण में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई और निर्माण कार्य केवल कागजों में पूरा दिखाने की जल्दबाजी की गई। परिणामस्वरूप पहली ही बारिश में तालाब का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण नियमानुसार हुआ होता तो इतनी जल्दी संरचना ध्वस्त नहीं होती।
इस पूरे मामले में वन विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता की निगरानी नहीं की गई और सरकारी राशि का उपयोग अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं हुआ।
यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

ग्रामीणों ने उठाए ये सवाल
पहली ही बारिश में तालाब क्यों बह गया?
निर्माण कार्य की तकनीकी जांच किसने की?
गुणवत्ता परीक्षण और माप पुस्तिका (एम.बी.) का सत्यापन किस अधिकारी ने किया?
निर्माण के दौरान किस स्तर पर निगरानी की गई?
सरकारी धन की क्षति के लिए जिम्मेदार कौन होगा?
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं राज्य सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने, दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और संबंधित एजेंसी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने तथा सरकारी धन की क्षति की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
वशिष्ठ टाइम्स की मांग
यदि सरकारी धन से बनाए गए निर्माण पहली ही बारिश में बह जाते हैं, तो यह केवल निर्माण की विफलता नहीं बल्कि जवाबदेही का भी गंभीर विषय है। पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में जनता के पैसे की इस प्रकार बर्बादी न हो।
विशेष संवाददाता |
Nilesh sony

