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कैदियों की रिहाई पर बिलासपुर हाईकोर्ट सख्त, पूछा- एक ही मामले में दो अलग-अलग मापदंड क्यों?……………….

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कैदियों की समय पूर्व रिहाई के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि समान अपराध और समान परिस्थितियों वाले कैदियों के मामलों में अलग-अलग मापदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने रिहाई प्रक्रिया में समानता के सिद्धांत को ध्यान में रखने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष तरीके से विचार कर उचित निर्णय लिया जाए।

मामला जांजगीर-चांपा जिले के हत्या प्रकरण से जुड़ा है। याचिकाकर्ता रामफल कश्यप (48) को वर्ष 2012 में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

वह पिछले कई वर्षों से बिलासपुर सेंट्रल जेल में बंद है। रामफल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 473 के तहत समय पूर्व रिहाई के लिए आवेदन किया था।

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट  में दलील दी कि इसी मामले में सह-आरोपी राकेश केवट की भूमिका भी समान थी, लेकिन उसके रिहाई आवेदन पर सकारात्मक राय दी गई। जबकि रामफल के मामले में बिना ठोस वजह के आपत्ति जताई गई।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि दोनों आरोपी एक ही घटना से जुड़े हैं और अपराध की परिस्थितियां समान हैं। ऐसे में एक आरोपी को राहत देने और दूसरे के मामले में अलग दृष्टिकोण अपनाने पर दोबारा विचार जरूरी है,

कोर्ट ने सीधे निचली अदालत की राय रद्द नहीं की, बल्कि जेल विभाग को निर्देश दिया कि सह-आरोपी को मिली सकारात्मक रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए रामफल कश्यप के आवेदन पर कानून के अनुसार जल्द फैसला लिया जाए।

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