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बसवाही, जिला कोरिया-“मनरेगा में फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप: ग्राम पंचायत बसवाही में मजदूरों के हक पर डाका, जांच की मांग तेज”……………..

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📍 बसवाही, जिला कोरिया (छत्तीसगढ़)
(विशेष संवाददाता)
Nilesh Sony

ग्राम पंचायत बसवाही में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार पंचायत में वास्तविक मजदूरों को काम से वंचित कर चुनिंदा लोगों की उपस्थिति दर्ज कराई जा रही है, जिससे योजना की पारदर्शिता और उद्देश्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन पंचायत में कथित रूप से कार्यस्थल पर पर्याप्त मजदूरों की मौजूदगी के बिना ही फोटो खिंचवाकर उपस्थिति दर्ज कराई जा रही है। आरोप है कि कुछ लोगों को घरों से बुलाकर केवल तस्वीरें लेने के लिए कार्यस्थल पहुंचाया जाता है, जबकि वास्तविक कार्य नगण्य रहता है।

जानकारी के अनुसार कुछ समय पूर्व भी मनरेगा कार्यों में अनियमितताओं को लेकर विवाद सामने आया था। उस दौरान तकनीकी निरीक्षण के आधार पर कुछ मजदूरों की उपस्थिति में कटौती की गई थी, जिसे लेकर पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों के बीच मतभेद की स्थिति बनी थी। अब पुनः सामने आए आरोपों ने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि कार्यस्थल पर मजदूरी करने के इच्छुक श्रमिकों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा, जबकि रिकॉर्ड में कार्य और उपस्थिति का विवरण कुछ और दर्शाया जा रहा है। इससे वास्तविक श्रमिकों के भुगतान पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

जिला प्रशासन से मांग

ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर कोरिया एवं संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि मनरेगा कार्यों, मस्टर रोल, उपस्थिति पंजी, भुगतान अभिलेख तथा कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

उठ रहे महत्वपूर्ण सवाल

क्या कार्यस्थल पर वास्तविक रूप से निर्धारित संख्या में मजदूर कार्य कर रहे हैं?

क्या मस्टर रोल और जमीनी हकीकत में अंतर है?

क्या पात्र मजदूरों को रोजगार से वंचित किया जा रहा है?

मनरेगा के तहत होने वाले भुगतान की निगरानी कितनी प्रभावी है?

ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में यदि पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई तो इसका सीधा नुकसान गरीब एवं मेहनतकश मजदूरों को उठाना पड़ेगा। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की संभावित जांच और कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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