Report Nilesh sony भरतपुर-सोनहत/कोरिया।
जल, जंगल और जमीन की रक्षा को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (GGP) ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम ने कहा कि जल-जंगल-जमीन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अस्तित्व, संस्कृति और जीवन का आधार हैं।
उन्होंने कहा कि जब जंगल कटते हैं, नदियां रोकी जाती हैं और गांव उजड़ते हैं, तब सबसे अधिक प्रभावित आदिवासी और वनांचल के मूल निवासी होते हैं।
श्याम सिंह मरकाम ने कहा कि आज विकास के नाम पर कई क्षेत्रों में वन, पहाड़ और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे समय में समाज के सभी वर्गों को आगे आकर पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठानी होगी।
उन्होंने कहा कि “जो आज मौन हैं, वे भी कल इसके दुष्परिणामों से अछूते नहीं रहेंगे।”
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की स्थापना वर्ष 1991 में आदिवासी समाज, गोंडी संस्कृति और क्षेत्रीय अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से की गई थी। पार्टी लंबे समय से जल, जंगल, जमीन और आदिवासी स्वाभिमान के मुद्दों को उठाती रही है। �
मरकाम ने कहा कि पार्टी का मानना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं, लेकिन इसके लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान आवश्यक है। उन्होंने युवाओं, किसानों, महिलाओं और सामाजिक संगठनों से प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए जनजागरण अभियान चलाने की अपील की।

उन्होंने कहा कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी केवल राजनीतिक संघर्ष नहीं कर रही, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए सामाजिक चेतना का आंदोलन चला रही है। पार्टी का लक्ष्य आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, वनाधिकार और स्थानीय संसाधनों पर समुदाय के अधिकार को मजबूत करना है। �
मरकाम ने कहा कि यदि जल रहेगा तो जीवन रहेगा, जंगल रहेगा तो पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और जमीन बचेगी तो समाज का अस्तित्व सुरक्षित रहेगा। इसलिए जल-जंगल-जमीन की रक्षा केवल आदिवासियों का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।
*(विशेष संवाददाता)*

