Report Nilesh sony
कोरिया/सोनहत:
छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद से जिले में कुछ नेताओं पर सत्ता का दुरुपयोग करने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा निजी द्वेष के चलते लोगों को परेशान किया जा रहा है। इन मामलों को लेकर समय-समय पर समाचार भी प्रकाशित होते रहे हैं। आरोप है कि सत्ता और राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर विरोध करने वालों को डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ लोगों ने दावा किया है कि खुलेआम यह कहा जाता है कि “तुम्हें बैकुंठपुर में नहीं रहने दिया जाएगा।” बताया जा रहा है कि इस तरह की बातें वहां मौजूद कई लोगों ने भी सुनी हैं।
वहीं यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ मामलों में फर्जी तरीके से एफआईआर दर्ज कराने का दबाव बनाया जा रहा है और इसमें संबंधित परिवार तथा समाज के लोगों को ही माध्यम बनाया जा रहा है। इन घटनाओं को लेकर क्षेत्र में कई सवाल उठने लगे हैं। आम लोगों के बीच चर्चा है कि यह सत्ता का नशा है या फिर प्रशासन और पुलिस पर राजनीतिक दबाव का असर। फिलहाल मामले को लेकर आधिकारिक रूप से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बैकुंठपुर क्षेत्र में इन दिनों पुलिस प्रशासन और कुछ जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं का माहौल बना हुआ है। जानकार सूत्रों के अनुसार, एक हवलदार नवीन साहू पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पैसों और प्रभाव के दम पर कई कार्य कराए जाने की बातें सामने आती रही हैं, जिससे आम जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सूत्रों का दावा है कि यदि संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। वहीं, इस संबंध में राज्य स्तर के नेताओं से लेकर दिल्ली तक शिकायत भेजे जाने की भी चर्चा है।
कुछ लोगों का आरोप है कि पार्टी और सत्ता से जुड़े कुछ प्रभावशाली व्यक्ति अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं, जिससे संगठन की छवि प्रभावित हो रही है। क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका राजनीतिक नुकसान भविष्य में पार्टी को उठाना पड़ सकता है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि कुछ नेता और प्रभावशाली लोग निजी लाभ एवं संपत्ति बढ़ाने में लगे हुए हैं, जबकि जनता के मुद्दे पीछे छूटते जा रहे हैं। वहीं, पत्रकारों द्वारा इन मामलों को उठाए जाने पर उन्हें दबाव और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि समाचार प्रकाशित करने वाले पत्रकारों को झूठे और मनगढ़ंत मामलों में फंसाने की कोशिश की जा रही है, ताकि आवाज को दबाया जा सके। इस पूरे मामले को लेकर संबंधित नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ दिल्ली तक पत्र भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा और राजनीतिक हलचल लगातार बनी हुई है।

