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आरक्षण खत्म करने की दिशा में बढ़ रहा छत्तीसगढ़? पदोन्नति में SC/ST आरक्षण पर गंभीर सवाल…………

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📰 वशिष्ठ टाइम्स

विशेष रिपोर्ट | छत्तीसगढ़
Nilesh Sony

रायपुर/विशेष संवाददाता:
छत्तीसगढ़ में पदोन्नति में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण को लेकर स्थिति लगातार विवादित होती जा रही है। समय बीतने के बावजूद राज्य सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर ठोस निर्णय लेने में असफल रही है, जिससे कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, लगभग दो वर्ष पूर्व SC/ST वर्ग के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व को लेकर क्वांटीफायबल डेटा एकत्र करने के लिए एक समिति का गठन किया गया था। हालांकि, हाल ही में उस समिति को समाप्त कर नई समिति का गठन कर दिया गया है, जिससे प्रक्रिया और अधिक लंबी हो गई है।

⚖️ हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

16 अप्रैल 2024 को उच्च न्यायालय ने तीन माह के भीतर पदोन्नति में आरक्षण रोस्टर लागू करने संबंधी निर्णय लेने का निर्देश दिया था। लेकिन इस आदेश के दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

📜 सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर भी अस्पष्टता

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1 मई 2023 और 24 फरवरी 2025 को दिए गए अंतरिम आदेशों के बावजूद, सामान्य प्रशासन विभाग और मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में इन आदेशों की स्पष्ट व्याख्या नहीं की गई है। जबकि इन आदेशों के तहत आरक्षण रोस्टर के साथ पदोन्नति संभव बताई जा रही है।

⚠️ बिना आरक्षण के भर रहे हैं पद

वर्तमान स्थिति में कई विभागों में रिक्त पदों को बिना आरक्षण के भरा जा रहा है। इससे आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में SC/ST वर्ग के लिए निर्धारित पद भी समाप्त हो सकते हैं।

📖 संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी

विशेषज्ञों का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 16(4-A) और 335 अभी भी प्रभावी हैं, जो पदोन्नति में आरक्षण का प्रावधान करते हैं। इसके बावजूद इनका पालन न होना गंभीर चिंता का विषय है।

📊 सामाजिक प्रभाव

राज्य में लगभग 45% SC/ST आबादी होने के बावजूद, उच्च पदों में उनकी भागीदारी लगातार कम होती जा रही है। इससे सामाजिक असंतुलन बढ़ने की आशंका है।

✊ आंदोलन की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग के SC/ST वर्ग के कुछ जागरूक शिक्षक आगामी जुलाई सत्र से इस मुद्दे पर संवैधानिक तरीके से सरकार का ध्यान आकर्षित करने की तैयारी कर रहे हैं।

सवाल उठता है…

क्या राज्य के SC/ST वर्ग अपने संवैधानिक अधिकारों से वंचित होते रहेंगे?
और आखिर कब तक इस मुद्दे पर निर्णय टलता रहे

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