छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अब सिर्फ पारंपरिक खेती के लिए नहीं, बल्कि फलोत्पादन की नई पहचान के लिए भी जाना जाने लगा है। यहां के किसान अब धान और पारंपरिक फसलों के साथ-साथ नाशपाती की खेती कर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ शासन और नाबार्ड की योजनाओं का लाभ लेकर अपनी करीब 4 से 5 एकड़ निजी जमीन पर नाशपाती का बगीचा तैयार किया है।
शासन की सहायता से खेत में कुआं और मोटर पंप जैसी सिंचाई सुविधाएं मिलने से खेती आसान और अधिक लाभकारी हो गई।

नाशपाती की खेती में आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है। कृषि वैज्ञानिक समय-समय पर खेतों का निरीक्षण कर किसानों को उन्नत उत्पादन तकनीक, पौधों की देखभाल और बेहतर प्रबंधन की जानकारी दे रहे हैं।
जशपुर की नाशपाती अब सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है। अपनी मिठास, गुणवत्ता और स्वाद के कारण इसकी मांग छत्तीसगढ़ के बड़े शहरों के साथ-साथ झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों में भी बढ़ रही है।
किसानों को बाहरी बाजारों में अच्छे दाम मिल रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है।
उद्यानिकी विभाग और विभिन्न संस्थाओं की ओर से किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे जिले में नाशपाती के साथ-साथ लीची, काजू और अन्य फल फसलों की खेती का दायरा भी बढ़ रहा है।

