नई दिल्ली/भोपाल। Report Nilesh sony
देशभर में सनातन धर्म की मूल जड़ों को पुनः सशक्त करने के उद्देश्य से सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा एक व्यापक अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
इस संदर्भ में विभिन्न संत-महात्माओं, कथा वाचकों एवं धर्मप्रेमियों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि सनातन धर्म की वास्तविक शक्ति ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों में निहित है, जिसे वर्तमान समय में उपेक्षित किया जा रहा है।
वक्ताओं ने बताया कि हजारों वर्षों की गुलामी और अत्याचारों के बावजूद सनातन धर्म की पहचान पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी, बल्कि आज भी देश के दूरस्थ क्षेत्रों में इसकी परंपराएं जीवित हैं।
हालांकि, वर्तमान समय में बड़े-बड़े आश्रम, मठ और धार्मिक आयोजन शहरों तक सीमित होते जा रहे हैं, जिससे मूल जड़ों से दूरी बढ़ रही है।
धार्मिक संगठनों ने यह भी चिंता जताई कि अन्य धर्मों द्वारा ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों में संगठित रूप से सेवा, शिक्षा और संसाधनों के माध्यम से अपनी पकड़ मजबूत की जा रही है।
ऐसे में सनातन समाज को भी इन क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने की आवश्यकता है।

भागवत कथा संघ द्वारा इस दिशा में एक राष्ट्रीय स्तर का अभियान प्रारंभ करने का आह्वान किया गया है। संघ ने सभी सनातन धर्मावलंबियों से अपील की है कि वे ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में भागवत कथा, हवन-पूजन, भंडारा एवं धार्मिक शिक्षा कार्यक्रमों का आयोजन करें, ताकि समाज में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का विस्तार हो सके।
साथ ही गौ सेवा और संरक्षण को भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। वक्ताओं ने कहा कि “गौ माता की रक्षा और सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार, दोनों मिलकर ही समाज के समग्र विकास और विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।”
अभियान से जुड़े पदाधिकारियों ने सभी लोगों से “तन, मन और धन” से सहयोग करने तथा अधिक से अधिक संख्या में जुड़कर इस मुहिम को सफल बनाने की अपील की है।
“जय गौ माता, जय भारत माता” के उद्घोष के साथ यह अभियान देशभर में तेजी से विस्तार लेने की ओर अग्रसर है।

