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जगदलपुर- प्रचंड गर्मी में भी ‘कूल-कूल’ एहसास दे रहा छत्तीसगढ़ का फेमस पिकनिक स्पॉट मांझीपाल, पहुंच रहे विदेशी सैलानी…………..

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छत्तीसगढ़ प्रकृति की अनुपम छटा, जनजातीय संस्कृति की आत्मीयता और रोमांच से सराबोर बस्तर अंचल का खूबसूरत ग्राम मांझीपाल आज छत्तीसगढ़ के सबसे तेजी से उभरते इको-टूरिज्म केंद्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है।

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्थित यह मनोरम स्थल अपने घने जंगलों, स्वच्छ कांगेर नदी और ग्रामीण परिवेश की सादगी के कारण देश-विदेश के सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बन गया है।

ग्रामीण और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए की गई विशेष पहल का ही परिणाम है कि आज मांझीपाल वैश्विक मानचित्र पर चमक रहा है। इस मॉडल से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है,

मांझीपाल की सबसे बड़ी यूएसपी यहाँ बहने वाली निर्मल कांगेर नदी है। नदी की शांत जलधारा में स्थानीय आदिवासियों द्वारा तैयार पारंपरिक बांस की नावों पर होने वाली बैम्बू राफ्टिंग पर्यटकों को बेहद रोमांचित कर रही है।

राफ्टिंग के दौरान सैलानी घने जंगलों की हरियाली, नदी के किनारों की प्राकृतिक सुंदरता और दुर्लभ पक्षियों की चहचहाहट के बीच प्रकृति को बेहद करीब से महसूस करते हैं।

मांझीपाल में स्थित “आमचो लाड़ी” होमस्टे आज बस्तर की पारंपरिक संस्कृति और ग्रामीण जीवनशैली को करीब से समझने का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन गया है। अपनी अनूठी और आत्मीय मेजबानी, बस्तरिया व्यंजनों के स्वाद और पारंपरिक परिवेश के कारण यह होमस्टे विदेशी पर्यटकों के बीच भी तेजी से अपनी पैठ बना रहा है।

राज्य सरकार की कम्युनिटी-बेस्ड टूरिज्म (सामुदायिक सहभागिता आधारित पर्यटन) नीति का सीधा और सकारात्मक असर अब बस्तर के ग्रामीण अंचलों में देखने को मिल रहा है।

पर्यटकों के लिए मांझीपाल पहुँचना बेहद सुगम और आसान है। यह खूबसूरत पर्यटन स्थल जिला मुख्यालय जगदलपुर से मात्र 35 से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जगदलपुर से दरभा मार्ग होते हुए बेहतरीन पक्की सड़क द्वारा निजी वाहन या स्थानीय टैक्सी से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा भी जगदलपुर में ही स्थित है, जिससे देश के किसी भी कोने से यहाँ का आगमन सुलभ हो जाता है।

 

 

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