(विशेष रिपोर्ट): Nilesh Sony
छत्तीसगढ़ में कथित फर्जी एफ़आईआर के विरोध में कांग्रेस कमेटी का आंदोलन दूसरे दिन और अधिक उग्र रूप धारण करता दिखाई दिया। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में थाने के सामने जारी धरने में प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की प्रभावशाली उपस्थिति ने इस आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन का रूप दे दिया है।
धरना स्थल पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी. एस. सिंहदेव, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत सहित सरगुजा संभाग के अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
आंदोलनकारियों ने इसे केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि न्यायिक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संघर्ष बताया।
धरना स्थल पर नेताओं ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे प्रश्न खड़े करते हुए कहा—
क्या कानून का दुरुपयोग कर निर्दोष नागरिकों को प्रताड़ित करना अब शासन की नई नीति बन चुकी है?


क्या पुलिस तंत्र पर राजनीतिक दबाव इतना हावी हो गया है कि सत्य और निष्पक्षता गौण हो गई है?
और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न—क्या आम जनता की आवाज को दबाने के लिए फर्जी मुकदमों का सहारा लिया जा रहा है?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि इस प्रकार की घटनाओं पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने वाला गंभीर संकेत होगा। जनहित की दृष्टि से यह आवश्यक हो जाता है कि प्रशासन पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ कार्य करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे।
धरने के दौरान नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच नहीं होती और न्याय नहीं मिलता, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


यह आंदोलन केवल एक एफआईआर का विरोध नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता और आम नागरिक के अधिकारों की रक्षा का सवाल बन चुका है।
अब देखना यह है कि सरकार इन तीखे सवालों का उत्तर किस प्रकार देती है और जनआक्रोश को शांत करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।

