📍 विशेष रिपोर्ट |वशिष्ठ टाइम्स ✍️ सिटी रिपोर्टर: गणेश सोनी
मध्य प्रदेश के वनांचल क्षेत्र के ग्राम चितरांव में तेंदूपत्ता तुड़ाई पर अचानक लगी रोक ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि एक ठेकेदार द्वारा मुंशियों, प्रबंधन और रोकड़ अधिकारी पर मनमाने आरोप लगाते हुए DFO को शिकायत की गई, जिसके आधार पर बिना मौके की जांच किए ही तेंदूपत्ता तोड़ना बंद करा दिया गया।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया जब तेंदूपत्ता संग्रहण वनांचल के गरीब और आदिवासी परिवारों के लिए साल का सबसे बड़ा रोज़गार का अवसर होता है।
17 तारीख से ग्राम चितरांव में तेंदूपत्ता तुड़ाई पूरी तरह बंद है, जबकि अन्य क्षेत्रों में अब भी पत्तियों की तुड़ाई जारी है।
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बड़े सवाल जो प्रशासन से जवाब मांगते हैं:
क्या केवल ठेकेदार की शिकायत पर बिना जांच के आदेश जारी करना न्यायसंगत है?
DFO ने मौके पर जाकर स्थिति का सत्यापन क्यों नहीं किया?
यदि कुछ खराब पत्तियां मिली थीं, तो पूरे क्षेत्र की तुड़ाई बंद करना किस नियम के तहत उचित ठहराया गया?
इस फैसले से प्रभावित गरीब परिवारों की आजीविका का जिम्मेदार कौन है?
क्या यह निर्णय किसी दबाव या मिलीभगत का परिणाम है?
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गरीबों की आजीविका पर सीधा हमला
तेंदूपत्ता तोड़ना वनांचल के हजारों परिवारों के लिए जीवनरेखा है। ऐसे में बिना ठोस जांच के लिया गया यह फैसला सीधे-सीधे गरीबों के पेट पर लात मारने जैसा है।

ग्रामीणों का कहना है कि “हम एक आस लगाकर बैठे थे, लेकिन इस फैसले ने हमारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।”
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जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल
इस गंभीर मुद्दे पर अब तक न तो क्षेत्रीय विधायक, न ही कलेक्टर, और न ही जिला पंचायत CEO की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने आई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है।
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मांग: निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि:
पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए
बिना जांच आदेश जारी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो
ठेकेदार की भूमिका की भी जांच की जाए
प्रभावित गरीब परिवारों को मुआवजा और पुनः तेंदूपत्ता तुड़ाई शुरू कराई जाए
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चितरांव का यह मामला सिर्फ एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का सवाल बन गया है।
अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो यह मुद्दा बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
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