प्रदेश में एचआईवी संक्रमित मरीज अब बीमारी से कम और सिस्टम की बेरुखी व लापरवाही से ज्यादा दम तोड़ रहे हैं।
राज्य शासन द्वारा मार्च 2026 के बाद विलासपुर, रायपुर और जगदलपुर में संचालित केयर सपोर्ट सेंटर बंद किए जाने के बाद सूबे के लगभग 40 हजार संक्रमिती की जिदगी बने अंधेरे और असुरक्षा के साये में पहुंच गई है।
हालात इस कदर खौफनाक हो चुके हैं कि बीते महज दो महीनों में प्रदेशभर में 65 से अधिक एचआईभी संक्रमितों की मौत हो चुकी है, जिनमें अकेले बिलासपुर संभाग की 22 मोते शामिल है।
इस संवेदनशील मामले में सबसे गंभीर बात यह है कि इन लाइफ सेविंग सेंटरों पर ताला लगाने के बाद शासन स्तर पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था तक तैयार नहीं की गई।

इलाज, दवाओं और नियमित मॉनिटरिंग का पूरा ढांचा ध्यास्त होने से मरीजों की हालत लगातार जानलेवा हो रही है,
सेंटरों के माध्यम से हर एक संक्रमित मरीज की पूरी जानकारी और मेडिकल हिस्ट्री की लगातार ट्रैकिंग की जाती थी,
किस मरीज की कौन सी जांच कब होनी है, कौन सा मरीज दूरी या किसी अन्य कारण से इलाज छोड़ रहा है, इसकी मॉनिटरिंग रोजाना होती थी।

