Home कोरिया कोरिया- “जंगल बचेंगे तो गांव बचेंगे” — बरदिया, पीपरडांड और कटोरिया अंचल...

कोरिया- “जंगल बचेंगे तो गांव बचेंगे” — बरदिया, पीपरडांड और कटोरिया अंचल से उठा वन संरक्षण का जनसंदेश………

23
0

विशेष रिपोर्ट।
श्री राम राजवाडे

बरदिया, पीपरडांड, कटोरा, करहियाखांड सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में जंगल केवल हरियाली का प्रतीक नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीण परिवारों की जीवनरेखा हैं।

गर्मी के मौसम में तेंदूपत्ता, महुआ, डोरी, सरई पान, दोना-पत्तल निर्माण, चिरौंजी, सरई फल तथा वन औषधियों से ग्रामीणों को रोजगार और आजीविका प्राप्त होती है।

मवेशियों के लिए चारा, लोगों के लिए प्राकृतिक दवाइयाँ और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव यही जंगल हैं।

लेकिन लगातार हो रही अंधाधुंध कटाई, अवैध दोहन और मानवीय लापरवाही के कारण वन क्षेत्र तेजी से सिकुड़ते जा रहे हैं। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते जंगलों को नहीं बचाया गया, तो आने वाली पीढ़ियों के सामने रोजगार, जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन की गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी।

वन क्षेत्रों से जुड़े लोगों का मानना है कि आज भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा जंगलों पर आधारित है। तेंदूपत्ता संग्रहण से हजारों परिवारों को मौसमी आय प्राप्त होती है, वहीं महुआ ग्रामीण संस्कृति और आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है।

सरई पत्तों से बनने वाले दोना-पत्तल आज भी बाजार में मांग रखते हैं। इसके अतिरिक्त जंगलों में उपलब्ध औषधीय वनस्पतियाँ ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की अनमोल धरोहर मानी जाती हैं।

पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संपदा हैं। यदि वन सुरक्षित रहेंगे तो जल स्रोत सुरक्षित रहेंगे, वर्षा संतुलित रहेगी और ग्रामीण रोजगार के नए अवसर लगातार मिलते रहेंगे। वन संरक्षण को केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता है।

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि वन संरक्षण के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, अवैध कटाई पर सख्त कार्रवाई हो तथा ग्रामीणों को वन आधारित रोजगार से जोड़ने के लिए विशेष योजनाएं बनाई जाएं।

आज आवश्यकता इस बात की है कि लोग जंगलों को केवल लकड़ी का स्रोत न समझें, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के रूप में देखें। यदि जंगल बचेंगे, तभी गांवों की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और मानव जीवन सुरक्षित रह सकेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here