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कोरिया- बर्दिया/ पंचायत छुहीया नाला पर मिट्टी डालकर पाटा गया जल स्रोत, ग्राम पंचायत बर्दिया में विकास के नाम पर विनाश का आरोप ग्रामीणों का फूटा आक्रोश — “जल संरक्षण की योजनाएं कागजों में, जमीन पर भ्रष्टाचार का साम्राज्य”…………

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बर्दिया/ पंचायत
विशेष रिपोर्ट। श्री राम राजवाडे

ग्राम पंचायत बर्दिया में स्थित वर्षों पुराना छुहीया नाला आज प्रशासनिक लापरवाही और पंचायत स्तर पर कथित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार जिस नाले से गांव के खेतों, पशुओं और भू-जल स्तर को जीवन मिलता था, उसी प्राकृतिक जल स्रोत को मिट्टी डालकर पाट दिया गया है। तस्वीरें गांव की वास्तविक स्थिति और विकास कार्यों की सच्चाई स्वयं बयां कर रही हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर बिना किसी पर्यावरणीय अनुमति और जनसहमति के नाले को मिट्टी से भरकर प्राकृतिक जल निकासी को बंद कर दिया गया, जिससे आने वाले समय में जल संकट, खेतों में जलभराव और पर्यावरणीय नुकसान की आशंका बढ़ गई है।

जिला पंचायत और प्रशासनिक दृष्टि से देखा जाए तो यह मामला केवल एक नाला पाटने का नहीं, बल्कि शासन की जल संरक्षण योजनाओं, ग्रामीण विकास और पर्यावरण सुरक्षा के दावों पर बड़ा सवाल है।

एक ओर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर “जल बचाओ” अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर गांवों में प्राकृतिक जल स्रोतों को समाप्त किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति हो रही है। गांव की सड़कों, नालियों, पेयजल और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पहले से बदहाल है, ऊपर से प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट कर भविष्य को संकट में डाला जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो बरसात के मौसम में गांव को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

किसानों ने चेतावनी दी है कि जल निकासी बाधित होने से खेतों की उपज और ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित होगी।

जिला प्रशासन से उठी बड़ी मांग

ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने जिला कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ से मांग की है कि —

छुहीया नाला पाटने की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

दोषी पंचायत अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई हो।

प्राकृतिक जल स्रोत को तत्काल पुनर्जीवित किया जाए।

ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्यों एवं खर्च की विशेष ऑडिट कराई जाए।

“तस्वीरें बता रही हैं गांव की सच्चाई”

ग्रामीणों का कहना है कि गांव की स्थिति देखकर सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि विकास के दावे कितने खोखले हैं।

जहां जल संरक्षण होना चाहिए था, वहां प्राकृतिक नाले तक मिट्टी से भर दिए गए। यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है।

यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला क्षेत्रीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण भ्रष्टाचार और पर्यावरण विनाश का बड़ा उदाहरण बन सकता है।

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