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शहडोल / जयसिंहनगर- खबर प्रकाशित होने के बाद पुरुष शौचालय शुरू, लेकिन महिला सुविधा बहाल न होने से ग्रामीणों में चिंता; पंचायत एवं जनपद प्रशासन से व्यवस्था सुधार की मांग…………..

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खबर (गणेश सोनी | सिटी रिपोर्टर)
शहडोल / जयसिंहनगर

जनपद पंचायत जयसिंहनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत सीधी में सांसद मद से निर्मित सामुदायिक शौचालय के संचालन एवं रखरखाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

वर्ष 2018 में लगभग 4 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस सार्वजनिक सुविधा का लोकार्पण तत्कालीन सांसद Riti Pathak द्वारा किया गया था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करना था।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, लंबे समय तक यह सार्वजनिक शौचालय पूर्ण रूप से आम नागरिकों के उपयोग में नहीं आ सका। हाल ही में मामला सामने आने और समाचार प्रकाशित होने के बाद पुरुष शौचालय का संचालन प्रारंभ कर दिया गया,

किंतु महिला शौचालय अब भी बंद बताया जा रहा है। इससे महिलाओं की सुविधा एवं स्वच्छता व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में असंतोष देखा जा रहा है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि शौचालय परिसर में नियमित साफ-सफाई एवं रखरखाव की कमी के कारण परिसर में गंदगी की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सार्वजनिक उपयोग की इस महत्वपूर्ण सुविधा का नियमित संचालन एवं निगरानी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है, ताकि ग्रामीणों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध हो सके।

मामले को लेकर पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी एवं संचालन व्यवस्था को लेकर विभिन्न पक्ष सामने आए हैं। पंचायत सचिव द्वारा समूह संचालन का हवाला दिए जाने के बाद अब यह अपेक्षा की जा रही है कि जनपद पंचायत एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारी पूरे मामले की वस्तुस्थिति की जांच कर स्पष्ट जिम्मेदारी तय करें।

स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता सुविधाओं के विस्तार पर लगातार जोर दिया जा रहा है। ऐसे में ग्राम पंचायत सीधी का यह मामला प्रशासन के लिए व्यवस्था सुधार एवं निगरानी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता की ओर संकेत करता है।

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन एवं जनपद पंचायत जयसिंहनगर से मांग की है कि महिला शौचालय को शीघ्र उपयोग हेतु खोला जाए, नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा सार्वजनिक संपत्तियों के संचालन एवं संरक्षण के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित किया जाए,

ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से ग्रामीणों तक पहुंच सके।

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