सिटी रिपोर्टर : गणेश सोनी
शहडोल जिले की ग्राम पंचायत चितरांव में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट ने विकराल रूप ले लिया है।
मई माह की तपती गर्मी में ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं, जबकि केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी “जल जीवन मिशन” योजना आज भी धरातल पर अधूरी दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी चितरांव की जनता को मूलभूत सुविधा स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
नल-जल योजना का कार्य अधूरा पड़ा है और जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी केवल कागजी खानापूर्ति में लगे हुए हैं।
गांव की महिलाएं और बुजुर्ग दूर-दूर से पानी लाने को विवश हैं, जिससे लोगों में भारी नाराजगी व्याप्त है।
स्थानीय लोगों ने ग्राम पंचायत सचिव पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि जल संकट जैसी गंभीर समस्या के बावजूद पंचायत स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले को प्रशासनिक विफलता बताते हुए जिला पंचायत शहडोल से तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक, एवं कलेक्टर शहडोल से हस्तक्षेप कर तत्काल जल संकट दूर कराने की मांग की है।
जल संसाधन विभाग और पंचायत विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
करोड़ों रुपये की योजनाओं के बावजूद यदि गांवों में पानी नहीं पहुंच पा रहा, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है।
चितरांव की जनता अब केवल आश्वासनों से नहीं, बल्कि जमीनी समाधान चाहती है।
भीषण गर्मी में प्यास से परेशान ग्रामीणों की पीड़ा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।

