शहडोल जयसिंहनगर
जनपद पंचायत जयसिंहनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत सीधी की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।
ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार पंचायत भवन को बाहर से साफ-सुथरा और व्यवस्थित दिखाने का प्रयास तो किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग बताई जा रही है।
आरोप है कि ग्राम पंचायत के सचिव केवल ग्राम सभा या विशेष बैठकों के दिन ही पंचायत पहुंचते हैं और “अतिरिक्त प्रभार” का हवाला देकर जल्द लौट जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर आम लोगों की समस्याओं का निराकरण समय पर नहीं हो पा रहा है, जिससे शासकीय योजनाओं का लाभ प्रभावित हो रहा है।

कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सचिव का व्यवहार आमजन के प्रति उचित नहीं है तथा लोगों से सम्मानपूर्वक संवाद भी नहीं किया जाता।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाए हैं कि पंचायत स्तर पर जातिगत भेदभाव और छुआछूत जैसी मानसिकता देखने को मिल रही है,

जो संविधान और सामाजिक समरसता की भावना के खिलाफ माना जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही संभव होगी, लेकिन ग्रामीणों में इसको लेकर भारी नाराजगी दिखाई दे रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि पंचायत सचिव नियमित रूप से पंचायत में उपस्थित नहीं रहते और आमजन की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते, तो इससे ग्रामीण विकास की योजनाएं प्रभावित होना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों ने जिला पंचायत शहडोल जनपद पंचायत जैसीनगर एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर कठोरू कार्रवाई की मांग की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत व्यवस्था ग्रामीण लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि इसी स्तर पर लापरवाही, अनुपस्थिति और भेदभाव जैसे आरोप सामने आते हैं तो यह शासन की ग्रामीण विकास नीति पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
अब देखना होगा कि जिला पंचायत और प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं तथा ग्रामीणों को न्याय और पारदर्शी व्यवस्था दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन गंभीर आरोपों को महज शिकायत मानकर टालता है या फिर ग्रामीण व्यवस्था में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व स्थापित करने हेतु ठोस कार्रवाई करता है।

