Report /Ganesh Soni
City reporter shehdol
शहडोल में लगातार बढ़ती गर्मी ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि सुबह 10 बजे से ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच रहा है, जिससे बाजारों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है।
तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण बच्चों, बुजुर्गों, मजदूरों, रिक्शा चालकों और राहगीरों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बस स्टैंड, अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों के बाहर लोगों के लिए न तो पर्याप्त छाया की व्यवस्था दिखाई दे रही है और न ही शुद्ध पेयजल की समुचित सुविधा उपलब्ध है।
दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आने लगी हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों से शहर आने वाले लोग तपती धूप में राहत के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि शहर के मुख्य स्थानों पर अस्थायी “शीतल जल केंद्र” स्थापित किए जाएं, जहां मुफ्त ठंडा पेयजल, ओआरएस और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था हो।
इसके साथ ही बाजार क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थलों पर टेंट, शेड और बैठने की व्यवस्था भी तत्काल कराई जाए ताकि राहगीरों को धूप से राहत मिल सके।

जनता का कहना है कि भीषण गर्मी केवल मौसम की समस्या नहीं, बल्कि “जल जीवन और जनस्वास्थ्य” से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और जल संकट जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में प्रशासन को आपदा प्रबंधन की तर्ज पर गर्मी से बचाव के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए।
स्थानीय लोगों ने क्षेत्रीय विधायक, नगर पालिका, जिला पंचायत एवं जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे केवल बैठकों तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर राहत कार्य शुरू करें।
शहर के प्रत्येक वार्ड में पानी के टैंकर, प्याऊ और छायादार विश्राम स्थल बनाए जाएं, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी मांग उठाई है कि स्कूलों, अस्पतालों और मजदूर बहुल क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाए तथा स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय रहकर लोगों को गर्मी से बचाव संबंधी जानकारी दें।
यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में भीषण गर्मी आम लोगों के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर असर डाल सकती है।
अब जनता की नजर जिला प्रशासन, नगर निकाय और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हुई है कि वे इस विकराल समस्या से निपटने के लिए कितनी संवेदनशीलता और तत्परता दिखाते हैं।

