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“तेंदूपत्ता फड़ नहीं खुलने से 300 परिवारों पर संकट: ग्राम पंचायत सोनहत में प्रशासनिक लापरवाही पर ग्रामीणों का फूटा आक्रोश” वन विभाग की उदासीनता से आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्र के परिवार रोजगार से वंचित, तत्काल कार्रवाई की मांग तेज…………..

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कोरिया/सोनहत |
Report Sanjay Chaudhari

जिला कोरिया के वनांचल क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत सोनहत में तेंदूपत्ता फड़ समय पर प्रारंभ नहीं होने से लगभग 300 तेंदूपत्ता संग्रहक परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि आसपास के पंचायतों में तेंदूपत्ता फड़ खोलकर संग्रहण कार्य शुरू कर दिया गया है, लेकिन सोनहत पंचायत में अब तक फड़ प्रारंभ नहीं किया गया,

जिससे गरीब एवं मजदूर परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण क्षेत्र के आदिवासी एवं वन आश्रित परिवारों के लिए मुख्य मौसमी आय का साधन माना जाता है।

हर वर्ष गर्मी के मौसम में ग्रामीण तेंदूपत्ता संग्रहण कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं, लेकिन इस वर्ष विभागीय लापरवाही एवं प्रशासनिक उदासीनता के कारण सैकड़ों परिवार बेरोजगारी और आर्थिक तंगी झेलने को मजबूर हैं।

इस गंभीर समस्या को लेकर ग्राम पंचायत सोनहत की सरपंच श्रीमती मानमती दिनेश सिंह एवं ग्रामवासियों ने संयुक्त रूप से वन मंडल अधिकारी, वन मंडल बैकुंठपुर, जिला कोरिया (छत्तीसगढ़) को आवेदन सौंपते हुए तत्काल तेंदूपत्ता फड़ खोलने और संग्रहण कार्य प्रारंभ कराने की मांग की है।

आवेदन में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि यदि शीघ्र फड़ प्रारंभ नहीं किया गया तो ग्रामीणों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा तथा शासन की वन उपज आधारित रोजगार व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होंगे।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभागीय स्तर पर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है, जबकि समय पर फड़ संचालन करना वन विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

ग्रामवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जनआंदोलन एवं धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन एवं वन विभाग से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए तथा सोनहत पंचायत में तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य शीघ्र प्रारंभ कराया जाए।

वनांचल क्षेत्रों में रोजगार के इस महत्वपूर्ण साधन पर प्रशासनिक ढिलाई ने एक बार फिर ग्रामीण विकास एवं वनाधिकार योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है।

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