छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायगढ़ जिले के बैकुंठपुर स्थित भूमि विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दूसरी अपील (सेकंड अपील) को खारिज कर दिया।
यह मामला मनोरंजन प्रसाद पांडेय द्वारा दायर दूसरी अपील से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने 1952 में किए गए एक रजिस्टर्ड बिक्री विलेख (सेल डीड) को निरस्त करने और जमीन पर अपने स्वामित्व का दावा किया था।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि, जमीन केवल आश्रम निर्माण के उद्देश्य से दी गई थी, कोई वास्तविक कीमत नहीं दी गई। आश्रम कभी बनाया ही नहीं गया। इसलिए यह बिक्री विलेख शून्य माना जाए।

इसमें कोई शर्त नहीं थी कि आश्रम बनाना अनिवार्य है। लेकिन न्यायालय ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
आश्रम से जुड़ा उल्लेख कोई बाध्यकारी कानूनी शर्त नहीं है। वसीयत के समय जमीन पहले ही बेची जा चुकी थी, इसलिए उस पर अधिकार नहीं बनता। अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ इस आधार पर कि आश्रम नहीं बना, बिक्री को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।

