रिपोर्ट: बनीमाधव कुशवाहा जिला रिपोर्टर शहडोल
सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत उजागर, जिम्मेदारों पर सवाल—क्या यही है ‘हर घर जल’ का वादा?
मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन की जमीनी सच्चाई एक बार फिर सामने आई है। ग्राम पंडोपारा (खैरवारिपारा) में बीते 6 महीनों से पेयजल संकट गहराया हुआ है। नल-जल योजना पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे ग्रामीणों को मजबूरन नदी का सहारा लेना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में स्थापित सोनारी सोलर ड्यूल पंप भी पिछले एक सप्ताह से बंद पड़ा है। इससे स्थिति और गंभीर हो गई है। गर्मी के इस मौसम में पानी की किल्लत ने लोगों का जीवन कठिन बना दिया है—महिलाओं और बच्चों को रोजाना दूर-दूर तक पानी लाने के लिए जाना पड़ रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कई बार पंचायत और संबंधित विभाग को शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।


मुख्य बिंदु:
6 महीनों से नल-जल योजना बंद
1 सप्ताह से सोलर ड्यूल पंप खराब
ग्रामीण नदी के गंदे पानी पर निर्भर
शिकायतों के बावजूद नहीं हुई सुनवाई
बड़ा सवाल:
जब केंद्र और राज्य सरकारें “हर घर जल” का दावा कर रही हैं, तो आखिर जमीनी स्तर पर योजनाएं क्यों दम तोड़ रही हैं?
प्रशासन से मांग:
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर नल-जल योजना और सोलर पंप को जल्द से जल्द सुधारने की मांग की है, ताकि उन्हें स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।
निष्कर्ष:
यह मामला सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि देशभर में चल रही योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो यह संकट और गहराता जाएगा।

