बस्तर में अब दो तरह के नए बस्तर नजर आ रहे हैं। एक ओर जहां खुशहाली का विस्तार हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर माफिया राज को बढ़ावा मिलता दिख रहा है।
नक्सलवाद का असर कम होते ही अब जिले में रेत माफिया बेखौफ काम कर रहे हैं। उनके सामने सारे नियम-कायदे बौने नजर आ रहे हैं।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी की गाइड लाइन कहती है कि किसी भी तरह से रेत खनन के लिए नदी के प्रवाह को प्रभावित नहीं किया जा सकता है

लेकिन जिले में रेत माफिया इतने बेखौफ हो चुके है कि उनके सामने ऐसे सारे नियम सिर्फ कागजी नजर आ रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि यह पूरा निर्माण बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के किया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक नदी के बीच मुरूम और रेत डालकर सड़क बनाई गई है,
साथ ही पाइप पुलिया डालकर नदी का पानी दूसरी ओर मोड़ दिया गया है, जिससे तस्करों को रेत निकालने और वाहनों की आवाजाही में आसानी हो सके।

