छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त पुलिस कर्मचारी रतन बहादुर को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी वसूली आदेश को निरस्त कर दिया है।
अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय ने बताया कि, नारायणी होम्स सकरी निवासी रतन बहादु सशस्त्र बल की दूसरी बटालियन में कॉस्टेबल पद पर पदस्थ थे।
बिलासपुर ने यह कहते हुए वसूली आदेश जारी कर दिया कि सेवाकाल के दौरान उन्हें गलत वेतनवृद्धि के कारण अधिक भुगतान हुआ है।

पक्षकारों ने दलील दी कि स्टेट ऑफ पंजाब बनाम रफीक मसीह, थॉमस डेनियल बनाम स्टेट ऑफ केरला और जोगेश्वर साहू बनाम यूनियन ऑफ इंडिया जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है,
कि सेवानिवृत्ति के बाद या उससे ठीक पहले वेतन की कथित अधिक भुगतान राशि की वसूली नहीं की जा सकती, खासकर तृतीय श्रेणी कर्मचारियों से।
हाईकोर्ट ने इन न्यायिक दृष्टांतों को आधार मानते हुए पाया कि रतन बहादुर तृतीय श्रेणी कर्मचारी थे और उनके सेवानिवृत्त होने के बाद वसूली आदेश जारी किया गया।

