बैकुंठपुर/कोरिया (विशेष रिपोर्ट):संजय
जनपद पंचायत बैकुंठपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बरदिया की स्थिति इन दिनों बेहद चिंताजनक और निराशाजनक बनी हुई है।
ग्रामीणों और सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पंचायत भवन के भीतर का नज़ारा ही प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां करता है।
परिसर में स्वच्छता का अभाव है, जगह-जगह निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी है और व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमराई हुई नजर आती हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव नियमित रूप से कार्यालय नहीं आते, जिससे जरूरी प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
वहीं सरपंच पर भी मूलभूत विकास कार्यों में रुचि न लेने का आरोप लग रहा है। पंचायत स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी साफ दिखाई दे रही है।
सबसे गंभीर आरोप रोजगार सहायक पर लगे हैं। सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि मनरेगा से जुड़े मांग पत्र (डिमांड) कथित रूप से “सेटिंग और कमीशन” के आधार पर निकाले जा रहे हैं।
इतना ही नहीं, फर्जी हाजिरी और बिल आहरण की भी आशंका जताई जा रही है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इसके अलावा 14वें वित्त आयोग के तहत प्राप्त मूलभूत राशि के उपयोग को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
पंचायत में विकास कार्यों के कोई ठोस प्रमाण या पारदर्शी जानकारी सामने नहीं आ रही है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।




प्रशासन से कार्रवाई की मांग:
ग्रामवासियों ने जिला पंचायत और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए,
ताकि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।


बरदिया:
ग्राम पंचायत बरदिया की यह स्थिति न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन की सच्चाई भी उजागर करती है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं।

