Report Nilesh sony………..
देश में गरीबों को पक्के मकान देने के उद्देश्य से चलाई जा रही प्रधानमंत्री आवास योजना का हाल अगर जिले के ग्राम कैलाशपुर जैसा है, तो यह केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है।
यहां सचिव और रोजगार सहायक पर लगे आरोप सिर्फ अनियमितता नहीं, बल्कि गरीबों के हक पर सीधा डाका हैं।
जिओ-टैगिंग जैसी पारदर्शी व्यवस्था को ही फर्जीवाड़े का हथियार बना लिया गया—कागजों में मकान तैयार, जबकि जमीनी हकीकत में ईंट तक नहीं रखी गई।
यह सिर्फ तकनीक की विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत का परिणाम है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारी “जांच” का हवाला देकर चुप हैं।
सवाल यह उठता है कि क्या जांच सिर्फ समय बिताने का माध्यम बन गई है? क्या गरीबों की आवाज इतनी कमजोर हो गई है कि उसे अनसुना कर दिया जाए?
अगर इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो यह संदेश जाएगा कि योजनाएं सिर्फ कागजों में चलती हैं और जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार ही असली हकीकत है।

का बड़ा सवाल—क्या प्रधानमंत्री आवास योजना में गरीबों का हक लूटा जा रहा है? के कैलाशपुर से आई तस्वीरें चौंकाने वाली हैं…”
तीसरी किस्त तक पैसा जारी
जिओ-टैगिंग के नाम पर फर्जीवाड़ा
सचिव और रोजगार सहायक पर आरोप
“क्या यह सिस्टम की नाकामी है या सुनियोजित भ्रष्टाचार?
”
“जिओ-टैगिंग जैसी तकनीक भी अगर फेल हो रही है, तो जिम्मेदार कौन?”
”
ग्राउंड रिपोर्टर
“ग्रामीणों का साफ कहना है कि बिना निर्माण के ही पूरी राशि निकाल ली गई, और शिकायत के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई…”
“सवाल बड़ा है—अगर गरीब का घर भी सुरक्षित नहीं, तो योजनाओं का क्या मतलब? जवाब चाहिए, कार्रवाई चाहिए!”
बड़ा खुलासा – पीएम आवास योजना में घोटाला!
📍 ग्राम कैलाशपुर,
बिना घर बने ही निकल गई पूरी रकम!
जिओ-टैगिंग के नाम पर फर्जीवाड़ा
सचिव और रोजगार सहायक पर गंभीर आरोप
👉 शिकायत के बाद भी प्रशासन “जांच” में व्यस्त
💬 ग्रामीण बोले – “हमारा हक लूट लिया गया!”
❗ सवाल:
क्या गरीबों के नाम पर योजनाएं सिर्फ कागजों में चल रही हैं?

