📍 विशेष रिपोर्ट | Nilesh Sony कोरिया–सूरजपुर/छत्तीसगढ़ | 17 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा के जरिए गांव-गांव तक रोशनी पहुंचाने वाले “सौर मित्र” आज खुद अंधेरे में जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
प्रदेश में क्रेडा (CREDA) के तहत कार्यरत लगभग 560 तकनीशियनों को सेवा से बाहर किए जाने के बाद न केवल उनके परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है,
बल्कि राज्य की सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
करीब एक दशक से अधिक समय से सोलर पैनल, पेयजल और सिंचाई योजनाओं के रखरखाव में जुटे इन कर्मियों को अचानक हटाए जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में सौर सिस्टम ठप पड़ने का खतरा बढ़ गया है।
इन तकनीशियनों के भरोसे ही दूरस्थ गांवों में सोलर लाइट, पानी और सिंचाई व्यवस्था संचालित होती रही है।


⚠️ आजीविका पर संकट, सड़क पर उतरने की तैयारी
प्रभावित कर्मियों का कहना है कि बिना पूर्व सूचना और वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाया गया है, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
अब ये सभी कर्मचारी उग्र आंदोलन की तैयारी में हैं और सरकार से पुनर्बहाली की मांग कर रहे हैं।
⚡ सोलर योजनाओं पर असर की आशंका
जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि इन अनुभवी तकनीशियनों को वापस नहीं लिया गया तो छत्तीसगढ़ की सौर पेयजल, सिंचाई और विद्युतीकरण योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर सिस्टम के रखरखाव के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी से हजारों गांवों की व्यवस्था चरमराने का खतरा है।


🗣️ पूर्व जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल
पूर्व विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा है कि सरकार को तत्काल निर्णय लेकर इन कर्मियों को पुनः सेवा में लेना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह मुद्दा प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है।
📉 बड़ा सवाल
एक ओर जहां देश नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ में इस तरह की कार्रवाई नीतिगत असंतुलन और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को उजागर करती है।
👉 अब सबसे बड़ा सवाल यही है:
क्या सौर ऊर्जा के सहारे विकसित हो रहे ग्रामीण भारत की नींव ही कमजोर की जा रही है?

