Home छत्तीसगढ़ “ताले में कैद पशु औषधालय: इलाज के बिना तड़पते मवेशी, जिम्मेदार नदारद”…………..

“ताले में कैद पशु औषधालय: इलाज के बिना तड़पते मवेशी, जिम्मेदार नदारद”…………..

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शहडोल (मध्य प्रदेश) |
विशेष रिपोर्ट
बेनी माधव कुशवाहा जिला रिपोर्टर

जिला शहडोल के ग्राम पंचायत सीधी अंतर्गत संचालित पशु औषधालय इन दिनों अपनी और विभागीय लापरवाही के कारण चर्चा में है।

ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों के हवाले से जो तस्वीर सामने आई है,

बताया जा रहा है कि पशु औषधालय में निर्धारित समय के बावजूद कर्मचारी नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते।

परिणामस्वरूप बीमार और घायल मवेशियों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता,
जिससे उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। कई मामलों में तो पशु बिना इलाज के ही तड़पने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि नियुक्त कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय “फील्ड सेटिंग” के नाम पर बाहर ही काम निपटा देते हैं और केंद्र पर आना जरूरी नहीं समझते।

इससे पशुपालकों में भारी आक्रोश है, क्योंकि उनका मुख्य सहारा यही सरकारी व्यवस्था है।

यह स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता को उजागर करती है, बल्कि सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी बेहद गंभीर सवाल खड़े करती है।

पशुओं के प्रति इस तरह की लापरवाही मानवीय संवेदनाओं के भी खिलाफ है।

❗ बड़ा सवाल:
जब सरकार पशु कल्याण के लिए योजनाएं चला रही है, तो जमीनी स्तर पर यह उदासीनता क्यों?

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग से मांग की है कि कर्मचारियों के निर्धारित की समय किया जाए

और केंद्र पर नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि मवेशियों को समय पर इलाज मिल सके।

अगर समय रहते इस लापरवाही पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह समस्या एक बड़े पशु संकट का रूप ले सकती है।

प्रशासन को अब जागना होगा—वरना यह “पशु औषधालय सीधी” सिर्फ नाम का ही रह जाएगा।

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