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“कागज़ों में विकास, ज़मीन पर अंधेरा: कुदरी पंचायत में सचिव–सरपंच की गैरहाज़िरी से भड़का जनाक्रोश”………….

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शहडोल (मध्य प्रदेश) |
विशेष रिपोर्ट
बेनी माधव कुशवाहा
जिला रिपोर्टर

14वें–15वें वित्त की राशि पर सवाल, मूलभूत सुविधाओं से वंचित ग्रामीण — प्रशासन की चुप्पी पर उठे प्रश्न

जिले की जनपद पंचायत जयसिंहनगर अंतर्गत ग्राम पंचायत कुदरी इन दिनों बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है।

स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के हवाले से जो तस्वीर सामने आई है, वह न सिर्फ चौंकाने वाली है बल्कि पंचायत व्यवस्था की जमीनी हकीकत को भी उजागर करती है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के जिम्मेदार — सचिव और सरपंच — गांव के पंचायत में नियमित रूप से उपस्थित ही नहीं रहते।

उनकी मौजूदगी सिर्फ औपचारिक “ग्राम सभा” तक सीमित रह गई है, जिससे विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं।

🔴 विकास गायब, समस्याओं का अंबार

ग्राम कुदरी में हालात इतने खराब हैं कि मूलभूत सुविधाएं भी ग्रामीणों के लिए सपना बन गई हैं।

गांव में स्ट्रीट लाइट का अभाव, अंधेरे में गुजरती रातें

नालियों का निर्माण नहीं, गंदगी और बीमारियों का खतरा

बिजली और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं की कमी

कहीं भी कोई ठोस विकास कार्य नजर नहीं आता

ग्रामीणों का साफ कहना है — “पंचायत में पैसा आता तो है, लेकिन जाता कहां है, इसका कोई हिसाब नहीं।”

🔴 14वें और 15वें वित्त की राशि पर बड़ा सवाल

सबसे गंभीर आरोप यह है कि 14वें वित्त आयोग, 15वें वित्त आयोग और मूलभूत मद की राशि का कोई स्पष्ट उपयोग गांव में दिखाई नहीं दे रहा।

ना कोई सार्वजनिक जानकारी, ना कोई पारदर्शिता — ऐसे में यह संदेह और गहरा जाता है कि कहीं धन का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा।

🔴 जिम्मेदारों पर सवाल, प्रशासन मौन

इस पूरे मामले में पंचायत सचिव की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्राम स्तर पर जिम्मेदारी निभाने के बजाय कर्तव्यों से दूरी और लापरवाही साफ नजर आ रही है, जो निंदनीय ही नहीं बल्कि जांच का विषय भी है।

जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है —

या फिर पूरे मामले को नजरअंदाज किया जा रहा है?

🔴 ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग

ग्रामवासियों में अब आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि:

पंचायत के कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए

वित्तीय राशि का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए

लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो

ग्राम पंचायत कुदरी की यह स्थिति केवल एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है।

यदि समय रहते जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकती है।

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