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“नल-जल योजना फेल: 5 महीने से सूखी टोंटियां, प्यास से जूझता चितरांव । चितरांव में गहराया जल संकट”?……

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शहडोल | विशेष रिपोर्ट
(ब्यूरो रिपोर्ट)
बेनी माधव कुशवाहा

मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के जनपद पंचायत जयसिंहनगर अंतर्गत ग्राम चितरांव में सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना पूरी तरह धराशायी नजर आ रही है।

हालात यह हैं कि पिछले करीब 5 महीनों से गांव में पानी की सप्लाई ठप पड़ी हुई है, जिससे ग्रामीणों का जीवन संकट में आ गया है।

गांव की गलियों में लगे नल अब केवल शोपीस बनकर रह गए हैं और घरों में पानी की एक-एक बूंद के लिए लोग तरस रहे हैं।

कई घरों के कुएं पूरी तरह सूख चुके हैं, जिससे ग्रामीणों को दूर-दराज के स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर होना पड़ रहा है।

योजना कागजों में, जमीन पर फेल”

सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर चलाई जा रही नल-जल योजना का यह हाल प्रशासनिक दावों की पोल खोलता है।

सवाल यह उठता है कि जब योजना का उद्देश्य हर घर तक पानी पहुंचाना है, तो फिर चितरांव जैसे गांव प्यासे क्यों हैं?

⚠️ पंचायत या पीएचई विभाग – जिम्मेदार कौन?

ग्रामीणों के अनुसार, इस समस्या को लेकर कई बार ग्राम पंचायत और पीएचई विभाग को अवगत कराया गया, लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई।

यह स्पष्ट नहीं है कि यह ग्राम पंचायत की घोर लापरवाही है या पीएचई विभाग की उदासीनता, लेकिन इसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।

🏛️ जिला प्रशासन पर भी उठे सवाल

इस गंभीर जल संकट के बावजूद जिला प्रशासन की भी सवालों के घेरे में है।

आखिर क्यों इतने लंबे समय तक समस्या बनी रही और किसी अधिकारी ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेना जरूरी नहीं समझा?

🗳️ जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर नाराजगी

स्थानीय विधायक और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी ग्रामीणों में आक्रोश का कारण बन रही है। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता आज इस बुनियादी समस्या पर मौन साधे हुए हैं।

💬 ग्रामीणों की पीड़ा

ग्रामीणों का कहना है:
“पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए हमें रोज संघर्ष करना पड़ रहा है। अगर यही हाल रहा, तो आने वाले दिनों में हालात और भी भयावह हो सकते हैं।”

अब बड़ा सवाल:?

क्या प्रशासन इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लेकर तत्काल समाधान करेगा?

या फिर चितरांव के ग्रामीण यूं ही प्यासे रहने को मजबूर रहेंगे?

चितरांव की यह स्थिति न केवल एक गांव की समस्या है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की विफलता का आईना है।

अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो नल-जल योजना केवल कागजों में ही सफल साबित होगी, जमीनी हकीकत में नहीं।

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