विशेष रिपोर्ट
(। रंजीत प्रजापति…..
कोरिया जिले अंतर्गत पराडोल बीट, देवगढ़ रेंज के ग्राम चक्डांड में इन दिनों जंगलों में आग लगने की घटनाएं चिंताजनक रूप से सामने आ रही हैं।
हालात इतने भयावह हैं कि मौके के दृश्य खुद इस बात की गवाही दे रहे हैं कि वन संपदा को बचाने के लिए जिम्मेदार तंत्र पूरी तरह नजर आ रहा है।
ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों के हवाले से जानकारी मिल रही है कि महुआ बीनने के नाम पर जंगलों में बेधड़क आग लगाई जा रही है।
यह आग धीरे-धीरे विकराल रूप लेती जा रही है, जिससे न केवल पुराने पेड़ जलकर राख हो रहे हैं, बल्कि नव विकसित पौधों और जैव विविधता को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरी स्थिति में वन विभाग की सक्रियता कहीं दिखाई नहीं दे रही है। क्षेत्रीय रेंजर और संबंधित अधिकारी न तो समय पर मौके पर पहुंच रहे हैं और न ही आग पर नियंत्रण के लिए कोई प्रभावी रणनीति अपनाते नजर आ रहे हैं।


इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लापरवाही यदि समय रहते नहीं रोकी गई, तो आने वाले समय में वन क्षेत्र का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है।
पर्यावरण संतुलन बिगड़ने के साथ-साथ वन्यजीवों का जीवन भी खतरे में आ जाएगा।
स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सख्त कदम उठाए जाएं,
यह घटना केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में वन संरक्षण की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए
, तो यह लापरवाही आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ा संकट बन सकती है।

