— खबर नीलेश सोनी-
📍 विशेष रिपोर्ट | कोरिया (छत्तीसगढ़)
ग्रामीणों का आरोप—एकमात्र भरोसेमंद जल स्रोत ठप, जिम्मेदार विभागों की चुप्पी से बढ़ी परेशानी
कोरिया जिले के अंतर्गत स्थित कोरिया नीर भैसवार पंचायत में वर्षों से बंद पड़े जल स्रोत ने अब एक जनसमस्या का रूप ले लिया है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह जल स्रोत कभी पूरे गांव के लिए पीने के पानी का मुख्य आधार था, लेकिन लंबे समय से इसकी मरम्मत या पुनः संचालन की दिशा में न तो पंचायत ने कोई ठोस कदम उठाया और न ही संबंधित विभाग ने ध्यान दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि कोरिया“नीर भैंसवार” में बंद हो जाने से अब उन्हें पेयजल के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है।

गर्मी के मौसम में यह समस्या और विकराल हो रही है, जिससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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🛑 प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
यह मामला सीधे तौर पर पंचायत राज व्यवस्था और जल संसाधन प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
जहां एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर जल जैसे महत्वाकांक्षी योजनाओं का दावा कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
ग्राम पंचायत स्तर पर निगरानी का अभाव साफ दिखाई देता है
जल संसाधन विभाग की निष्क्रियता भी उजागर हो रही है
वर्षों से बंद पड़े इस स्रोत की कोई तकनीकी जांच या मरम्मत नहीं की गई
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⚠️ विभागीय उदासीनता या प्रणालीगत विफलता?
प्रशासनिक दृष्टि से यह केवल एक बंद जल स्रोत का मामला नहीं, बल्कि प्रणालीगत विफलता का उदाहरण बनता जा रहा है।
यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह समस्या बड़े जल संकट में बदल सकती है।
, ऐसे मामलों में संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करना और नियमित निरीक्षण अनिवार्य होता है, लेकिन यहां जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया ही शून्य नजर आती है।
📢 ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि:
शीघ्र मरम्मत और पुनः संचालन सुनिश्चित किया जाए
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कोरिया का यह मामला यह दर्शाता है कि योजनाएं कागजों में भले ही सफल हों, लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की कमी से आम जनता को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
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ग्राम पंचायत भौसवार

