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“जयसिंहनगर तहसील में रिश्वतखोरी का जाल? कोटवार पर किसानों से अवैध वसूली के गंभीर आरोप, ”………….

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Report… Beni Madhav kushvaha
District reporter……

हेडलाइन:

मध्यप्रदेश के जयसिंहनगर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत कुदरी से एक गंभीर मामला सामने आया है,

जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

गांव के निवासी गोपि प्रसाद कुशवाहा उर्फ गोपी कुशवाहा, जो कोटवार पद पर कार्यरत है, पर किसानों से अवैध रूप से पैसे वसूलने के आरोप लगे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, कोटवार गोपी कुशवाहा खुद को प्रशासनिक अधिकारी की तरह प्रस्तुत करता है और किसानों से विभिन्न कार्यों के नाम पर पैसे लेता है।

जब किसान अपने पैसे या काम के बारे में पूछते हैं, तो वह कथित रूप से यह कहकर पल्ला झाड़ लेता है कि “मैंने पैसा पटवारी, तहसीलदार और SDM तक पहुंचा दिया है, आपका काम हो जाएगा।”

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपों के अनुसार, गोपी कुशवाहा किसानों को खुलेआम चुनौती देता है कि वे जहां चाहें शिकायत कर लें—उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा।

 

इससे न केवल प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, बल्कि यह भी संकेत मिलता है कि कहीं न कहीं उच्च स्तर तक मिलीभगत हो सकती है।

ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में पहले भी कई बार मौखिक शिकायतें तहसील स्तर पर की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

इससे किसानों में आक्रोश और असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।

🔍 बड़े सवाल:

क्या कोटवार के जरिए वसूला गया पैसा वास्तव में उच्च अधिकारियों तक पहुंच रहा है?

शिकायतों के बावजूद प्रशासन निष्क्रिय क्यों है?

क्या यह मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित है या पूरे तंत्र में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं?

📢 मांग:
स्थानीय नागरिकों और किसानों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किसी उच्च स्तरीय एजेंसी से कराने की मांग की है, ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके और आम जनता का प्रशासन पर भरोसा बहाल हो।

👉 यह मामला केवल एक गांव तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाता है।

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