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“सांसद निधि से मिला टैंकर दो साल से लावारिस: ग्राम पंचायत सीधी की घोर लापरवाही या सरकारी संपत्ति की सुनियोजित अनदेखी?”…………..

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✍️ विशेष रिपोर्ट: Beni Madhav kushvaha जिला रिपोर्टर….

हेडलाइन:
“जनहित के संसाधन का दुरुपयोग—प्रशासनिक जवाबदेही और पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल”

जिला शहडोल के ग्राम पंचायत सीधी में जनप्रतिनिधियों द्वारा उपलब्ध कराए गए संसाधनों की उपयोगिता और निगरानी पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।

क्षेत्र की सांसद रीती पाठक द्वारा जनहित में प्रदत्त पानी का टैंकर पिछले लगभग दो वर्षों से अधिक समय से लावारिस अवस्था में पड़ा हुआ है।

यह टैंकर ग्राम पंचायत क्षेत्र में वन अवरोध नाका के समीप, गौशाला मार्ग के किनारे निष्क्रिय स्थिति में पड़ा है,

जो न केवल सरकारी संपत्ति की उपेक्षा को दर्शाता है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता को भी उजागर करता है।

⚖️ प्रशासनिक और विधिक पहलू

सरकारी संसाधनों का इस प्रकार परित्यक्त अवस्था में पड़े रहना लोक संपत्ति संरक्षण अधिनियम तथा पंचायत राज अधिनियम के तहत गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है।

यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि संबंधित ग्राम पंचायत एवं जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में विफल रहे हैं।

यदि सांसद निधि या अन्य सरकारी योजना के अंतर्गत प्राप्त सामग्री का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप नहीं किया जाता,

तो यह वित्तीय अनियमितता एवं जवाबदेही तय करने योग्य मामला बनता है।

🔍 जमीनी हकीकत

सांसद द्वारा क्षेत्र के नागरिकों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने हेतु दिया गया यह टैंकर आज उपयोग के बजाय उपेक्षा का शिकार है।

इससे यह सवाल उठता है कि:

 

क्या पंचायत स्तर पर निगरानी तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय है?

🚨 जनहित में उठते सवाल

दो वर्षों से टैंकर लावारिस क्यों पड़ा है?

क्या इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को नहीं है या जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?

इस सरकारी संपत्ति के संरक्षण और उपयोग की जिम्मेदारी किसकी है?

यह मामला न केवल ग्राम पंचायत सीधी की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि पूरे की जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न उठाता है।

,क्या ग्राम पंचायतें सरकारी संपत्तियों को संभालने में पूरी तरह असफल हो रही हैं?

ताकि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोहराई न जाए और जनहित के संसाधनों का सही उपयोग हो सके।

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