Home कोरिया “हरित फंड से राख तक: कैंपा योजना में 20 हेक्टेयर बांस रोपण...

“हरित फंड से राख तक: कैंपा योजना में 20 हेक्टेयर बांस रोपण खाक—स्थानीय लापरवाही या वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं पर सवाल?”…………….

19
0

✍️ Report: Nilesh Soni…

हेडलाइन…

📍 कोरिया/बैकुंठपुर (छत्तीसगढ़)

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी हरित पहल मध्य कैंपा योजना एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है।

कोरिया वन मंडल के बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत देवगढ़ सर्किल के कटगोड़ी पश्चिम परिसर (दामुज) में वर्ष 2023-24 के दौरान 20 हेक्टेयर क्षेत्र में लगाए गए 8000 बांस पौधों का पूरा रोपण आग में जलकर नष्ट हो गया।

यह घटना केवल स्थानीय स्तर की विफलता नहीं, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं—जैसे जलवायु परिवर्तन से निपटने और हरित आवरण बढ़ाने के दावों—पर भी सीधा सवाल खड़ा करती है।


करोड़ों की योजना, शून्य परिणाम—जिम्मेदार कौन?

सूत्रों के अनुसार, इस रोपण कार्य पर लाखों-करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे। लेकिन न तो फायर लाइन का समुचित निर्माण हुआ, न ही नियमित निगरानी सुनिश्चित की गई।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि: ?

क्या वन विभाग ने आग से बचाव के मानक प्रोटोकॉल का पालन किया?

क्या जमीनी स्तर पर कोई जवाबदेह अधिकारी मौजूद था?

आग लगने के बाद तत्काल नियंत्रण के प्रयास क्यों नाकाम रहे?

⚠️ विभागीय ढिलाई या सुनियोजित भ्रष्टाचार?

> “वन आग की घटनाएं केवल प्राकृतिक नहीं होतीं, इनमें मानवीय लापरवाही या योजनाबद्ध साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।”

क्या कोरिया वन मंडल की ‘ग्रीन कमिटमेंट’ सिर्फ कागजों में?

पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन कम करने के बड़े दावे करता है।

लेकिन जमीनी स्तर पर इस तरह की घटनाएं उन दावों की विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं।

अगर हरित योजनाएं इसी तरह कुप्रबंधन और लापरवाही का शिकार होती रहीं, तो:

⚫ पर्यावरणीय और सामाजिक नुकसान

बांस जैसे तेजी से बढ़ने वाले पौधों का नष्ट होना केवल आर्थिक क्षति नहीं है, बल्कि यह:

स्थानीय जैव विविधता के लिए बड़ा खतरा है

ग्रामीण आजीविका पर भी असर डालता है

जलवायु संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है

🌿 पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता

छत्तीसगढ़ वन विभाग ने दोहराया है कि राज्य में हरित आवरण बढ़ाने और जैव विविधता संरक्षण के लिए कैंपा योजना के तहत निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।

इस घटना को एक चुनौती के रूप में लेते हुए विभाग भविष्य में:
बेहतर फायर मैनेजमेंट सिस्टम
स्थानीय समुदाय की सहभागिता
तकनीकी निगरानी (monitoring system)
को और मजबूत करेगा।

भविष्य के लिए पारदर्शी और जवाबदेह तंत्र विकसित किया जाए

❗ हरियाली का सपना या भ्रष्टाचार का खेल?

मध्य कैंपा योजना के तहत किया गया यह वृक्षारोपण अब एक बड़े सवाल के रूप में खड़ा है—

क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों में हरियाली दिखाने तक सीमित रहेंगी, या वास्तव में धरातल पर पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य हासिल होगा?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here