✍️ विशेष रिपोर्ट |सोनहत वनांचल से ग्राउंड रिपोर्ट निलेष सोनी …..
वनांचल सोनहत में आंगनबाड़ी व्यवस्था ध्वस्त! बच्चों के पोषण से खिलवाड़, सुपरवाइजर नदारद – विभागीय गाड़ी बनी खंडहर(वनांचल क्षेत्र) – महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायतों में संचालित लगभग 184 आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को निर्धारित मेनू चार्ट के अनुसार पोषण आहार नहीं दिया जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि –
मीठे के नाम पर केवल पपीता बांटा जा रहा है,
खीर-पूरी के स्थान पर सिर्फ लाल भाजी परोस दी जाती है,
कई केंद्र सहायिकाओं के भरोसे चल रहे हैं।
यह सीधे तौर पर बच्चों के पोषण स्तर और स्वास्थ्य के साथ समझौता माना जा रहा है।
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📌 सुपरवाइजर की अनुपस्थिति, फोन पर चल रही निगरानी
महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले विभिन्न सेक्टरों में नियुक्त सुपरवाइजरों की क्षेत्र में नियमित उपस्थिति नहीं है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि –
सुपरवाइजरों का क्षेत्र में निवास की व्यवस्था होते हुए भी वे रहते नहीं हैं,
निरीक्षण के बजाय फोन पर मीटिंग कर औपचारिकता पूरी की जाती है,
भौतिक सत्यापन लगभग न के बराबर है।
इससे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है।
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🚗 विभाग की सरकारी सुमो बनी कबाड़
सबसे चिंताजनक तथ्य यह सामने आया है कि विभाग के कार्यालय के सामने खड़ी पुरानी सरकारी सुमो वाहन अब खंडहर में तब्दील हो चुकी है।
वर्षों से अनुपयोगी पड़ी है,
अधिकारियों के पास मैदानी दौरे के लिए वाहन उपलब्ध नहीं,
नतीजतन क्षेत्रीय निरीक्षण प्रभावित।
वनांचल क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए वाहन सुविधा अत्यंत आवश्यक है, लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई दिखाई दे रही है।
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⚖️ राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल
क्या बच्चों के पोषण के साथ यह खुला खिलवाड़ नहीं है?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई होगी?
क्या शासन इस गंभीर लापरवाही पर संज्ञान लेगा?
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मांग की है कि –
1. सभी 185 आंगनबाड़ी केंद्रों का तत्काल भौतिक सत्यापन कराया जाए।
2. अनुपस्थित सुपरवाइजरों पर निलंबनात्मक कार्रवाई हो।
3. विभाग को तत्काल नया वाहन उपलब्ध कराया जाए।
4. पोषण आहार की आपूर्ति की जांच उच्च स्तरीय टीम से कराई जाए।
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🔎 निष्कर्ष
वनांचल सोनहत में महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही ने बच्चों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो यह मामला प्रदेश ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।
अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब और कैसी कार्रवाई करता है।

